स्वतंत्र विचार

पता नहीं सुशासन किसे कहते हैं

कलयुग की कलम

पता नहीं सुशासन किसे कहते हैं

सरकार और प्रशासन में अच्छे बुरे सभी तरह के लोग होते हैं अच्छे लोग अच्छाई की कोशिश करते हैं और बुरे लोग उन कोशिशों को नाकाम करने में लगे रहते हैं। सरकार योजनाएं बहुत अच्छी बनाती है लेकिन इस योजनाओं को क्रियान्वित करने वाले प्रशासनिक व्यक्ति के ऊपर निर्भर है कि वह उन को सफल करें या विफल। हमारे यहां सिस्टम ऐसा बना हुआ है कि आप को पता है कि यह आदमी भ्रष्ट है लेकिन आप उसके खिलाफ कुछ नहीं कर पाते, और जो कर सकते हैं वह चुप बैठे रहते हैं। हालत यह है कि भ्रष्ट लोग व चापलूसी करने वाले लोगों की तादाद बहुत ज्यादा हो गई है। ऐसे मे यह भी एक बात होती है कि कैसे इस पूरी गंदगी को साफ किया जाए। पहले तो धर्म के रास्ते से आदमी को पाप मुक्त बनाया जा सकता था लेकिन अब वह बात नहीं रही बल्कि आज के जमाने में भ्रष्ट आदमी ज्यादा छाया रहता है जिसे मानने के लिए सभी आम आदमी कुछ विचार नहीं करते और मान लेते हैं। पता ही नहीं चलता कि हम इस करप्ट सिस्टम में कैसे अपने आप को ढाल पाएंगे। कौन इस करप्ट सिस्टम को दूर कर पाएगा और हर बार यह कब तक सिलसिला चलेगा। इंसान की फितरत भगवान भी नहीं समझ सकता कब वह माहौल को जन्नत बना दे या जहन्नुम बना दे इसके लिए कोई और दोषी नहीं हम और हमारा समूह जो सहनशीलता की हदों से कहीं आगे है जिम्मेदार है। हमने ही गलत लोगों को आगे आने में समर्थन दिया सामूहिक रुप से मिलकर हमने कभी भी विरोध नहीं किया और उसी का नतीजा यह रहा कि हम बेहद सहनशील हो गए। बस एक ही ईश्वर से प्रार्थना है कि एक अच्छाई का वायरस इंसान में झोंक दे।

अशोक मेहता,

इंदौर (लेखक, पत्रकार, पर्यावरणविद)

 

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