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🙏🏻साहब ! सब गोलमाल है . . . 🙏🏻 विकास से कोसों दूर : सोहावल ब्लॉक की सबसे बड़ी पंचायत बाबूपुर

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विकास से कोसों दूर : सोहावल ब्लॉक की सबसे बड़ी पंचायत बाबूपुर

KKK न्यूज सतना, (ओपी तीसरे/सोनू पाल)। आज हम बात कर रहे हैं बाबूपुर पंचायत की जो सोहावल जनपद के अंतर्गत सतना जिले से मात्र 5 किलोमीटर की दूरी पर है. क्षेत्रफल की दृष्टि से भी यह पंचायत बड़ी पंचायत है, लेकिन यहां विकास न के बराबर है. हम जो तस्वीर दिखा रहे हैं वह तस्वीर बाबूपुर पंचायत की एक ऐसे रोड की है, जहां पिछड़ा और दलित बस्तियां हैं और यह बस्तियां काफी पुरानी बस्ती हैं. लेकिन कुछ साल पहले जब गगनेंद्र प्रताप सिंह जिला पंचायत अध्यक्ष और पुष्पराज बागरी जिला पंचायत अध्यक्ष थे जो वर्तमान में विधायक बनने का सपना सजाए बैठे हैं उन्होंने इस रोड का शिलान्यास किया था, जिसका पत्थर आज भी रोड के किनारे डला हुआ है. यह रोड कागजों में कई बार बन चुकी, लेकिन जमीनी हकीकत कुछ और ही है. आज इस रोड में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जिस पर पर धान की खेती आराम से की जा सकती है और उत्पादन भी लिया जा सकता है. कुछ समय पहले रैगांव विधानसभा में सड़कों को लेकर काफी विरोध देखने को मिला. पुष्पराज की सीट भाजपा कहीं गवां न दे, इसलिए पुष्पराज के द्वारा सुझाए गए ग्राम के लिए डीपीआर तैयार करके रोडो का निर्माण करने की पहल शुरू हो गई है. लेकिन शहर के सबसे नजदीक का गांव विकास से कब तक अछूता रहेगा. इसी पंचायत से इनके छोटे अनुज देवराज बागरी की राइस मिल भी है और सबसे ज्यादा भाजपा को वोट भी इसी पंचायत से मिलती है. लेकिन जहां पिछड़ा और दलित बस्तियां हैं वहां विकास नहीं हो पा रहा है. इसी तरह आज हम दूसरी घटना के बारे में भी बता रहे हैं जो पानी की टंकियों को लेकर है. बाबूपुर और सोहौला ग्राम पंचायत जो कि सोहावल जनपद के अंतर्गत आता है. दोनों पंचायतों को मिलाकर कुल आबादी 8000 है, जो कि बाबूपुर पंचायत सबसे बड़ी पंचायत है. लेकिन यदि विकास की बात करें तो यहां पर न तो रोड है और न ही पानी का कोई साधन. यहां की आम जनता दिन भर मजदूरी करती है और रात में पानी के लिए डब्बे बाल्टी लेकर कई किलोमीटर से पानी लाकर अपना जीवन यापन करती है. सरकार ने नल-जल योजना के द्वारा हर घर में 55 लीटर पानी पहुंचाने का वादा किया है, लेकिन सरकार के सारे वादे जमीनी स्तर पर खोखले साबित हो रहे हैं. क्योंकि शायद विकास करने का एक नया नियम बन गया है कि जहां पर सबसे ज्यादा विकास होगा, सारी योजनाओं का लाभ उसी को मिलेगा. आपको बता दें कि सरकार के द्वारा सोहावल पंचायत को नल-जल योजना के अंतर्गत 120000 लीटर की पानी की टंकी स्वीकृत की गई है, जबकि सुहावल पंचायत में दो पानी की टंकी पहले से ही बनी हुई है और पानी की सप्लाई निरंतर चल रही है. जिस पानी के लिए बाबूपुर और सोहौला के लोग एक-एक बूंद के लिए दिन-रात भटकते हैं. इसके उलट दूसरी पंचायत सोहावल में पानी को व्यर्थ बहता हुआ गलियों में देखा जा सकता है. सुहावल पंचायत की पास हुई टंकी बाबूपुर पंचायत में बन रही है और 1 किलोमीटर तक पाइप लाइन को बिछाकर सरकार के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है. यह टंकी सुहावल पंचायत में भी बन सकती थी, जिससे शासन का पैसा इतनी लंबी पाइप लाइन बिछाने में बचता. लेकिन यहां हर किसी को अपनी-अपनी कमीशन की पड़ी है. वह चाहे जनता की जेब फाड़ कर निकालना पड़े.

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