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कोई बदलाव इंडिया में न तेरे मशवरे से होगा

कलयुग की कलम

कोई बदलाव इंडिया में न तेरे मशवरे से होगा

अब सच जो बोलेगा वो शख्स कटघरे में होगा

एक करोड़ से भी कम आबादी वाले देश के खिलाड़ी ओलम्पिक में सोना, चांदी के पदक बटोर रहे हैं और 135 करोड़ से ज़्यादा आबादी वाले भारत के खिलाड़ी एक अदद सोने के पदक के लिए तरस रहे हैं ।

अभी तक जो भी पदक मिले हैं और आगे जो भी पदक मिलेंगे वो केवल और केवल खिलाड़ी और उसके कोच की मेहनत के बदौलत ही मिले हैं और मिलेंगे, इसमें सरकार का कोई योगदान नहीं है । वैसे भी जिस देश की सरकार खेल बजट में भारी भरकम कटौती कर सकती है उस देश के लिए पदकों का अकाल पड़ना स्वाभाविक ही है ।

जब कोई खिलाड़ी पदक पाता है या पदक पाने के नजदीक पहुंचता है तो जब देश और प्रदेश के मुखिया बधाई और शुभकामनाएं देते हैं तो ऐसा लगता है कि खिलाड़ियों को गालियां दे रहे हैं । अपने ऐशोआराम के लिए खेल बजट में भारी भरकम कटौती करने वालों को कोई हक नहीं है कि वे बधाई और शुभकामनाओं की आड़ में खिलाड़ियों के जख्मों पर नमक छिड़कें ।

भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीम के खिलाडिय़ों ने सीमित साधनों में अपना सर्व स्वन्योछावर कर जो भी बेहतर कर सकते थे किया । जहां पुरूष हॉकी टीम ने चार दशक से ज्यादा के सूखे को दूर कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया वहीं महिला हॉकी टीम ने ओलम्पिक में इतिहास रचते हुए पहली बार अंतिम चार में जगह बनाकर सेमीफाइनल खेला । जहां तक जय पराजय की बात है तो वह मैच का अभिन्न हिस्सा है । यही बात व्यक्तिगत स्पर्धाओं में पार्टिशिपेट कर रहे खिलाड़ियों पर भी लागू होती है ।

अपने हिस्से पराजय आने से किसी भी खिलाड़ी को न तो शर्मिंदा होने की जरूरत है न ही हतोत्साहित होने की । हर भारतीय को अपने खिलाड़ियों पर नाज है । शर्मिंदगी तो सरकार के खाते में जाती है जिसने खेल बजट में सैकड़ों करोड़ की बजटीय कटौती की है ।

एक पखवाड़े में जिस हॉकी खिलाड़ी के नाम पर राष्ट्रीय खेल दिवस मनाया जाने वाला है, जो खेल के हिस्से लागू किये गए पहले भारत रत्न का सही मायने में दावेदार है, जिसने देश प्रेम की खातिर हिटलर के प्रस्ताव को ठुकरा दिया था, जिसे दुनिया हॉकी का जादूगर कहती है उन स्वर्गीय मेजर ध्यानचंद को सरकार द्वारा भारत रत्न नहीं दिया जाना क्रिकेट को छोड़कर हॉकी और अन्य खेलों के प्रति सरकार की घटिया मानसिकता को उजागर करने के लिए पर्याप्त है ।

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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