UNCATEGORIZED

बुलंद हौसलों की मिसाल थे गुलाम भारत के ‘तिलक’ और ‘आजाद’

कलयुग की कलम

बुलंद हौसलों की मिसाल थे गुलाम भारत के ‘तिलक’ और ‘आजाद’

कलयुग की कलम समाचार पत्र

भारत की आजादी के दो मतवाले लोकमान्य बाल गंगाधर ‘तिलक’ और शेर दिल चंद्रशेखर आजाद 21वीं सदी में भी हर भारतीय के दिलों में बसते हैं. तभी तो जन्म दोनों महापुरुषों का जिक्र आता है, तो जिंदादिली का जो भाव दिल में आता है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता.

14 वर्ष की आयु में असहयोग आंदोलन से जुड़े आजाद

चंद्रशेखर आजाद का जन्म आज ही के दिन यानी 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का भाबरा में हुआ था. 1920 में 14 वर्ष की आयु में चंद्रशेखर आजाद गांधी जी के असहयोग आंदोलन से जुड़े थे. 14 साल की ही उम्र में वो गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए. चंद्रशेखर आजाद की निशानेबाजी बचपन से बहुत अच्छी थी. सन् 1922 में चौरी-चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया, तो देश के तमाम नवयुवकों की तरह आज़ाद का भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया. जिसके बाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी ने 1924 में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ का गठन किया. चन्द्रशेखर आजाद भी इस दल में शामिल हो गए. आजाद ने सशस्त्र क्रान्ति के माध्यम से देश को आजाद कराने वाले युवकों का एक दल बना लिया, जिसमें शचीन्द्रनाथ सान्याल, बटुकेश्वर दत्त, भगतसिंह, सुखदेव, राजगुरु, बिस्मिल, अशफाक, जयदेव, शिव प्रसाद गुप्त, दामोदर स्वरूप, आचार्य धरमवीर आदि उनके सहयोगी थे. बाद में काकोरी कांड, अंग्रेज अफसर जेपी सांडर्स की हत्या और दिल्ली की केंद्रीय असेंबली में बम विस्फोट जैसी घटनाओं में अग्रणी भूमिका निभाने वाले आजाद प्रयागराज के अल्फ्रेड पार्क में 27 फरवरी 1931 को वीरगति को प्राप्त हुए थे.

स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा : तिलक

बाल गंगाधर तिलक का जन्म 23 जुलाई 1856 को महाराष्ट्र के रत्नागिरि के चिखली गांव में हुआ था. अपने परिश्रम के बल पर शाला के मेधावी छात्रों में बाल गंगाधर तिलक की गिनती होती थी. सन्‌ 1879 में उन्होंने बीए तथा कानून की परीक्षा उत्तीर्ण की. सन्‌ 1880 में न्यू इंग्लिश स्कूल और कुछ साल बाद फर्ग्युसन कॉलेज की स्थापना की. इन्होंने सबसे पहले ब्रिटिश राज के दौरान पूर्ण स्वराज की मांग उठाई. उन्होंने ‘स्वराज्य मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है और मैं इसे लेकर रहूंगा’ का नारा दिया. तिलक के क्रांतिकारी कदमों से अंग्रेज बौखला गए. उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चलाकर 6 साल के लिए ‘देश निकाला’ का दंड दिया और बर्मा की मांडले जेल भेज दिया गया. इस अवधि में तिलक ने गीता का अध्ययन किया और ‘गीता रहस्य’ नामक भाष्य भी लिखा. जेल से छूटने के बाद उन्होंने स्वदेशी आंदोलन चलाया. तिलक ने मराठी में ‘मराठा दर्पण’ व ‘केसरी’ नाम से दो दैनिक समाचार पत्र शुरू किए. तिलक ने अंग्रेजी शासन की क्रूरता और भारतीय संस्कृति के प्रति हीनभावना की बहुत आलोचना की. 1 अगस्त 1920 में लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी लोकमान्य तिलक का मुंबई में निधन हो गया.

(ओपी तीसरे) संभागीय ब्यूरो चीफ

   कलयुग की कलम समाचार पत्र

Related Articles

error: Content is protected !!
Close