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बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभानअल्लाह

कलयुग की कलम

बड़े मियां तो बड़े मियां छोटे मियां सुभानअल्लाह

कलयुग की कलम

ना पानी गिरा ना आंधी चली – मालूम नहीं क्यों बिजली बंद है” उक्त उदगार बड़े ऑफिस से कुछ दिन पूर्व छोटे ऑफिस भेजे गए कम्पनी मालिक के कृपापात्र सुभाष नागेश्वर ने दुबे कॉलोनी, एनकेजे एरिया की रात भर बिजली बंद रहने पर शिकायतकर्ता से कही । प्रभावित क्षेत्रों में सुबह पानी के लिए मचे हाहाकार पर जब कलेक्टर के कानों आवाज़ पहुंची तब कलेक्टर की आवाज सुनकर बिजली अधिकारियों की नींद टूटी । विभागीय सूत्रों द्वारा तो यहां तक कहा जाता है कि बिजली लाईनों के रखरखाव का प्रभार जिस अधिकारी को दिया गया है वह तो खुद को एम डी का बाप समझता है तभी तो आम आदमी का फोन उठाना तो दूर वह सुधार कार्य में लगे अपने ही विभाग के कर्मचारियों तक का फोन उठाने में अपनी तौहीन समझता है । बिजली के मनमाने भारीभरकम बिलों ने आम उपभोक्ताओं की नाक में दम कर रखा है । नियमित कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे विभाग को संविदा और आउटसोर्सिंग के कर्मचारियों ने अराजकतापूर्ण बनाकर रखा हुआ है जिसका खामियाजा जनता को लम्बे समय से भुगतना पड़ रहा है । बिजली विभाग भी शासन के दूसरे विभागों से अलग नहीं है । जिस तरह शासन के द्वारा प्रमुख और मालदार पदों पर परदे के पीछे बोली लगाकर ज़्यादा माल सप्लाई करने वाले की पोस्टिंग की जाती है उसी तरह बिजली विभाग में भी पिछले एक दशक से भी ज्यादा समय से नियमित और वरिष्ठों को दरकिनार कर करेंट चार्ज के नाम पर पोस्टिंग की दी जा रही है । स्वाभाविक है हराम की कमाई और गॉडफादरों के चरण चुंबन को बनाये रखने के लिए गरीब की लुगाई के सम्मान की आहुति तो दी ही जायेगी । 20 दिन पूर्व ही बड़े कार्यालय से एक कृपापात्र कार्यपालन अभियंता को अधीक्षण अभियंता का प्रभारी बनाकर कटनी भेजा गया है । बड़े मियां और छोटे मियां की जुगलबंदी के आलम का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि शहर के एक एरिये में रातभर बिजली बंद रही और जिस काम को अधीक्षण अभियंता को करना चाहिए था उस काम को कलेक्टर को करना पड़ा । हो सकता है कि यदि मामले ने तूल पकड़ा तो मगरमच्छों को बचाने के लिए मछलियों की बलि दे दी जायेगी । काली कमाई की भगदौड़ में शामिल अधिकारियों ने खुद को इतना नीचे गिरा दिया कि कभी कलेक्टर के समानांतर रुतवा रखने वाले डिवीजनल इंजीनियर की औकात चवन्नी भर भी नहीं रह गई ।

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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