मध्यप्रदेश

आये दिन पत्रकारों का रोना रहता है कि उन्हें न तो बडकैया न ही छुटभैया नेता भाव देते हैं । न मंत्री न ही संतरी । पत्रकार वार्ता तक बिना सूचना रदद् कर दी जाती है ।

कलयुग की कलम

आये दिन पत्रकारों का रोना रहता है कि उन्हें न तो बडकैया न ही छुटभैया नेता भाव देते हैं । न मंत्री न ही संतरी । पत्रकार वार्ता तक बिना सूचना रदद् कर दी जाती है ।
कलयुग की कलम डॉट कॉम

सुलगता यक्ष सवाल यह है कि अपने ही हाथों अपने मान सम्मान को दो कौड़ी से भी गया बीता कर चुके पददलितों को आखिरकार भाव क्यों दिया जाय ?
कड़वा सच यह है कि अधिकांश पत्रकारों ने लिफ़ाफ़े और पुड़ी की ख़ातिर कतिपय नेताओं की चौखट पर अपने ज़मीर को गिरवी रखा हुआ है । नेताओं को भी पता है कि किस पत्रकार की क्या हैसियत है । बहुतायत पत्रकार सुविधाभोगी पत्रकारिता पर विश्वास कर नेताओं की विरुदावली का गायन करती खबरों को प्रकाशित करते देखे जा सकते हैं । पत्रकारों द्वारा जारी समाचारों से सहज समझा जा सकता है कि भले ही कटनी जिला बन गया है लेकिन लिफाफा और पुड़ी धारी नेता नाराज न होने पाए इस सोच के साथ आज भी कस्बाई मानसिकता से ऊपर नहीं उठ पाया है ।
यही कारण है कि सारा जिला नरक और आमजन नरकवासी बनकर रह गये हैं । अधिकारीवर्ग जिले को सहज चारागाह समझ कर चर रहे हैं । पत्रकारों की भीड़ बिना बुलाये पहुंचकर आगे पीछे घूमती रहती है । बिना मान सम्मान समाचार प्रकाशित करते रहते हैं । तो फ़िर कोई क्यों कर सम्मान दे पत्रकारों को ! कहते हैं न बिन मांगे मोती मिले, मांगे मिले न भीख ।

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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