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सरकार की मंजूरी बिना बस मालिकों ने कर डाली किराये में अंधाधुंध बढोत्तरी

कलयुग की कलम

सरकार की मंजूरी बिना बस मालिकों ने कर डाली किराये में अंधाधुंध बढोत्तरी

जिम्मेदारों के मुंह में जमे दही का खामियाजा भुगत रहा सामान्य आदमी

रसोई गैस, पेट्रोल, डीजल की आसमान छूती कीमतों पर पूरी तरह असफल हो चुकी मोदी सरकार के नाकारापन की मार आम आदमी के जेब पर भारी पड़ रही है ।

डीजल की शतकीय पारी पूरी होते ही बस मालिकों ने यात्री किराये में मनमानी बढोत्तरी कर दी है । जिससे आये दिन यात्रियों और टिकिट परिचालक के बीच कहासुनी की वारदातें सामने आ रही हैं ।

ऐसा वाक्या मां वैष्णो बस सर्विस रीवा द्वारा संचालित बस जो कटनी से रीवा जा रही थी उसमें टिकिट परिचालक द्वारा कटनी से रीवा जा रहे यात्रियों के 250 रुपये बसूल किये जा रहे थे जबकि आन लाईन बुकिंग करने पर किराया 200 रुपये दर्शा रहा था । इसके पहले भी किराया 200 रुपये ही लग रहा था । यही हाल पूरे प्रदेश की हर सड़क पर चल रही बसों में आम हो चला है ।

पिछले साल कोविड काल शुरू होते ही बस मालिकों ने सरकार पर ब्लैकमेलिंग का दवाव बनाते हुए यात्री किराये में अच्छी खासी बढ़ोत्तरी कर दी थी । एक बार फिर किराये में लगभग 25 फीसदी के इजाफे ने आम आदमी की कमर ही तोड़ कर रख दी है ।

शिवराजी सरकार और उसके सरकारी नुमाइंदों का हराम की कमाई की चादर ओढ़े हुआ निकम्मापन आमजन को रसोई से लेकर सड़क तक खून के आंसू रुला रहा है । शव राज में तब्दील होती जा रही शिवराजी सरकार से किसी भी तरीके की उम्मीद जताना बेमानी साबित हो रहा है ।

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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