मध्यप्रदेश

सट्टेबाजों के चेहरे खिल खिल उठे “किसके इशारे से सट्टा चल रहा” कोई तो रोको…….?

कलयुग की कलम

सट्टेबाजों के चेहरे खिल खिल उठे

किसके इशारे से सट्टा चल रहा

                कोई तो रोको…….?

 

     ( कलयुग की कलम )

रतलाम । जाँबाज आई.पी.एस. अफसर जिला पुलिस कप्तान गौरव सरकार सट्टे व अन्य अपराधों के खिलाफ फरमान देते आये है । जब भी रतलामी जनता जनार्दन ने देखा है वे अपराधियों के खिलाफ सख्त ही नजर आये जिससे रत्नपुरी नगरी में सिंघम की उपाधि मिली है। एेनी टाइम अवैध धन्धों पर लगाम कसने के लिये समय – समय अभियान चलाये जाते रहे और उन अभियानों के परिणाम बाबा महाकाल की कृपा से लाजवाब निकले हैं। इसी वजह से कई रिकार्ड तोड़ पारीयाँ इतिहास के सुनहरी पन्नों में दर्ज हो चुकी। परन्तु न जाने क्यों इन कई अभियानों में हर थाना प्रभारी चौकी प्रभारी उस अभियान में तो एक से बढ़कर एक ताबातोड़ धुआंधार पारी खेली जाती है लेकिन न जाने क्यों एक समय बाद फिर वही नॉर्मल – रूठीन वाली प्रक्रिया धीमी होते ही फिर से इन खईवाली की चल निकल पडती हैं। इस तरह सटोरियों के लुका छिपी के खेल का द एण्ड शायद ही कभी हो। और द एण्ड होगा भी नहीं क्योंकि जिसके हत्थे-पल्ले पडे सब के सब हाथ सेकने में लगे तो कोई कम तो कोई ज्यादा तो कोई अति ही कर देता इसीलिये किसी ने सच ही कहा महाभारत काल से लेकर आज तक लाखों मारे गये, लाखों खफ गये फिर भी हिन्दुस्तान चैन से नहीं जी पाया…….?

आज की तय तारीख से सवा माह पूर्व रतलाम जिले का सबसे कीम थाना माणक चौक थाने पर थाना प्रभारी अय्यूब भाई जान थे तब थोड़ा बहुत अंकुश था । ग्रामीण अंचल बाजना से पधारे नवागत थानेदार दिलीप राजोरिया महाशय ने माणक चौक थाने की कमान संभाली है। माणक चौक थाना क्षैत्र के कुछ प्रसिद्ध प्रसिद्ध चौराहे, गली, मोहल्ले, खासतौर से हरदेव लाला की पीपली, मोमिनपुरा, धानमण्डी, चाँदनी चौक, तोपखाना, गौशाला रोड, इस वक्त इस घड़ी में दस से लेकर पन्द्रह जगह नजर आने वाला तो सट्टा चल ही रहा और न नजर आने वाला सट्टा तो कसम से इनकी दो गुनी तो फिक्स मानकर चलो यानी कि अंदर बाहर फिफ्टी के आस पास तो तय है ।

शायद मानो ऐसा लग रहा कि लॉकडाउन के बाद अनलॉक में इन सटोरियों को लोगों के खुलिल्ये खखेरने के लाइसेंस रीन्यू हो गये है। आज का जो नजारा नजर आ रहा है जैसे लॉकडाउन के बाद अनलॉक में इन सटोरियों को भी काम धंधे से लगा देना यह भी किसी बहुत बड़े पुण्य से कम नहीं है। तभी तो जिसे देखो जिधर देखो इधर देखो उधर देखो सटोरियों के चेहरे ” कमल ” की तरह खिल-खिले उठे जिसे देखो थानेदार साहब की बहुत ही दरियादिली जय जयकार हो रही है। और उनकी जय जयकार होनी भी चाहिये ।

चीता पार्टी की तो चप्पे-चप्पे पर नजर है लेकिन माणक चौक के टी.आई. दिलीप राजोरिया साहब को इनकी भनक है के भी नहीं यह तो चीता पार्टी जाने, या फिर थी स्टार वाले साहब जाने या फिर सटोरिये जाने या फिर राम ही जाने…….?

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