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तत्कालीन एम डी पंकज अग्रवाल के कार्यकाल में चालू की गई मोलतोल कर प्रभारी बनाने की घटिया प्रथा आज भी बिना रोकटोक चालू है ।

कलयुग की कलम

तत्कालीन एम डी पंकज अग्रवाल के कार्यकाल में चालू की गई मोलतोल कर प्रभारी बनाने की घटिया प्रथा आज भी बिना रोकटोक चालू है ।

आने वाले हर एम डी ने इस दास प्रथा को रोकने के बजाय चालू ही रखा है ।

21वीं सदी में भी शर्मनाक गुलामीयत की प्रतीक दास प्रथा के पोषक मौजूद हैं ।

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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