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तोड़-बट्टे में फितरत की जोड़-तोड़ राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट । अन्त काल पछतायेगा, तब प्राण जायेंगे छूट ।।

कलयुग की कलम

तोड़-बट्टे में फितरत की जोड़-तोड़

राम नाम की लूट है, लूट सके तो लूट ।

अन्त काल पछतायेगा, तब प्राण जायेंगे छूट ।।

     ✍🏻मनोज शर्मा पुजारी

कलयुग की कलम

रतलाम । जक्शन दिल्ली -मुम्बई रेल रूट के बीचो बीच मैन सेन्टर रतलाम जक्शन किसी जमाने में रेल्वे के ( डायमण्ड क्रॉसिंग ) काफी मशहूर हुआ करता था यानि कि बड़ी रेल लाइन के बीच में से छोटी रेल गुजरने वाला वह दौर भी क्या दौर रहा जो अब इतिहास के पन्नों में सिमट कर रह गया । अब तो बस सिर्फ यादें है और यादें ही रह गई । परन्तु रेल पटरी के इस पार और रेल पटरी के उस पार कईयों की चल निकल पड़ी ।

              वैसे ही बचपन में वो अन्टीयो और अब्बू वाला दौर जब आप और हम बचपने में अन्टी का खेल खेला करते तो अन्टी ताड़ने में जरा सी भी चूक हो जाती तो खेल खेलने वाला साथी फौरन उस चूक के एवज में फौरन ( गच्चा ) रखवा कर बाजी मार ले जाता था ।

            उस तर्ज पर पक्ष क्रमांक एक और पक्ष क्रमांक दो या दोनों ही पक्षकार के लिये एक कॉफी लोकप्रिय कहावत सदियों से चली आ रही कि चोर चोरी करते पकड़ा जाये तो चोर नहीं तो साहूकार तो है ही ।

            आज के इस कलयुग के दौर में जिसको जितना मिल रहा है उसे उतना कम लग रहा उसे और ज्यादा से ज्यादा करने के चक्कर में कुछ तो सीधे-सीधे एक से दस करने की फितरत में कोई ब्राउन शुगर, तो कोई हथियार तस्करी, तो कोई हीरोइन, तो कोई चरस, तो कोई अफीम, तो कोई कोकीन, तो कोई डोडा चूरा, तो कोई अवैध गांजा, तो कोई अवैध भांग, तो कोई सट्टा, तो कोई अवैध दारू, तो कोई अवैध देह व्यापार, तो कोई जहरीली शराब, तो कोई खटिया के ( धूर – पटास ) के खेल में किसी खतरों के खिलाड़ी के हत्थे चढ बैठते तब शुरू होता है तोड बट्टे का खेल खेल में भी जहाँ जहाँ तक हो सके वो भी अपनी जोड़-तोड़ करने से पीछे नहीं हटता तो कभी तोड़ – बट्टे वालों की लाइन क्लियर हो जाती तो कभी जोड़-तोड़ करने वालों की लाइन क्लियर हो जाती ।

                जबकि सच्चाई यह है कि सिकन्दर जैसे बादशाह खाली हाथ आये और खाली हाथ चले गये सिर्फ फर्क है तो वो है ( पाप की गठरी ) का वो तो सब अपने अपने हिसाब किताब से तोल तोल के बाँध रहे हैं। किसी ने सच ही कहा है कि ऊपर वाला सब देख रहा है जैसा तेरा गाना वैसा ही उसका बजा

जो बोयेगा, वही पायेगा ।

तेरा किया आगे आयेगा ।।

सुख -दुख है क्या कर्मों का ।

जैसी करनी, वैसी भरनी ।।

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