मध्यप्रदेश

बाढ़ रोकने कागजों तक सीमित प्रशासनिक तैयारी.. शिव सिंह बाढ़ के लिए गलत नीतियां जिम्मेदार

कलयुग की कलम

बाढ़ रोकने कागजों तक सीमित प्रशासनिक तैयारी.. शिव सिंह

बाढ़ के लिए गलत नीतियां जिम्मेदार

रीवा .. संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक शिव सिंह ने कहा कि सरकार की गलत नीतियों के चलते सन 1997 से रीवा जिला लगातार बाढ़ त्रासदी झेल रहा है अब तो हालात और खराब हो चुके हैं सरकार ने बीहर नदी क्षेत्र से जुड़ी जितनी योजनाओं का निर्माण किया वे सभी योजनाएं कहीं न कहीं बाढ़ के लिए जिम्मेदार हैं 1 सितंबर 1997 की बाढ़ त्रासदी की जांच शासन स्तर पर हुई थी जिसमें बीहर एवं वकिया बराज के गेट समय से खुलना नहीं पाया गया प्रथम दृष्टया वही बाढ़ का कारण था लेकिन सन 1997 के बाद बीहर नदी में जो भी निर्माण शासन द्वारा कराए गए उसमें छोटी पुल की कम लंबाई एवं ऊंचाई बड़ी पुल की अपेक्षा 5.41 मीटर कम कर दी गई जबकि 1986 एवं 1987 में तत्कालीन इंजीनियरों ने बड़ी पुल को किले की जमीन के बराबर बनाया था जिससे बाढ़ का खतरा न बने छोटी पुल के निर्माण के बाद अजगरहा बाईपास बीहर नदी पर जो पुल का निर्माण कराया गया उसकी लंबाई जहां लगभग 100 मीटर से अधिक होनी चाहिए लगभग 60 मीटर कर दी गई उसके बाद करहिया मंडी को जोड़ने वाले जिस पुल का निर्माण कराया गया उसकी भी लंबाई चौड़ाई ऊंचाई कम कर दी गई जिससे शहरी क्षेत्र में पानी की ठेक लग जाती है यह सभी कारण बाढ़ के लिए जिम्मेदार हैं इको पार्क मौत के झूला पुल की घटना सभी ने देखा इसी तरह रिंग रोड के निर्माण दौरान पुल पुलियो की संख्या कम कर दी गई नतीजा शहर से लेकर गांव तक बाढ़ के हालात पैदा हुए इसके बावजूद भी सरकार व प्रशासन ने सबक नहीं लियाा

बिना गहरीकरण के ग्रीन कॉरिडोर का निर्माण बाढ़ त्रासदी को आमंत्रण

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सन 2017 में भाजपा सरकार के नेताओं ने नदी के दोनों किनारों पर ग्रीन कॉरिडोर बनाए जाने योजना तैयार किए योजना के पूर्व और बाद में लगातार हम यह मांग करते रहे की ऐसी योजनाओं के लिए नदी का गहरीकरण अति आवश्यक है गहरीकरण से बाढ़ मे काफी राहत मिलेगी लेकिन शासन प्रशासन ने इस ओर ध्यान नहीं दिया और ग्रीन कॉरिडोर का काम आरंभ कर दिया बिना गहरीकरण के जो दीवाल नदी के किनारे बनाई जा रही है उससे बाढ़ का खतरा उत्पन्न होने की संभावना है जब पानी की आवक ज्यादा बढ़ेगी तब दीवाल के दबाव के चलते बस्तियों को जाने वाले नालों से पानी शहर के अंदर प्रवेश करेगा बस्तियों को नुकसान पहुंचाएगा बिना रणनीति के प्रशासन की कार्यशैली बाढ़ को आमंत्रण दे रही तथा स्टॉर्म वॉटर प्रोजेक्ट के तहत 22 करोड़ रुपए की लागत से शहर के अंदर जिन बड़े नालों का निर्माण कराया गया है वह नाले घटिया निर्माण के चलते जमींदोज पड़े हैं प्रशासन का इस ओर भी ध्यान नहीं है नींद बाढ़ के बाद ही खुलेगी जब शहर जलमग्न हो जाएगा

बाढ़ रोकने कागजों तक सीमित प्रशासनिक तैयारी

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रीवा शहर सहित जिले के सैकड़ों गांव प्रत्येक वर्ष कहीं न कहीं बाढ़ की चपेट में आते हैं शहर को छोड़ जो गांव का क्षेत्र है वह कृषि क्षेत्र है गांव की तबाही के साथ-साथ किसान की फसलों का भारी मात्रा में नुकसान होता है प्रत्येक वर्ष शासन प्रशासन के लोग बैठके करके कागजों पर बाढ़ आपदा रोकने रणनीति तैयार करते हैं इसके बाद वह रणनीति मात्र कागजों तक सीमित रह जाती है प्रशासन ने हाल ही में फैली कोरोना महामारी से भी सबक नहीं लिया लोगों को घरों में कैद करके बीमारी का इलाज करती रही इसी तरह जब बाढ़ त्रासदी आती है तब लोगों को घरों से निकालकर राहत केंद्रों में ले जाकर बाढ़ राहत सामग्री का बंदरबांट करते हैं और यही सिलसिला प्रत्येक वर्ष चलता रहता है प्रशासनिक अमला मालामाल होता है पीड़ित परिवार पीड़ित ही रह जाता है

शिव सिंह संयोजक संयुक्त किसान मोर्चा रीवा संभाग मध्य प्रदेश

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