मध्यप्रदेश

अब पीएचक्यू करेगा प्रतिनियुक्ति और स्थानांतरण, आदेश जारी’ आरामदायक’ स्थानों पर तैनात पुलिस कर्मियों को लगा झटका

कलयुग की कलम

अब पीएचक्यू करेगा प्रतिनियुक्ति और स्थानांतरण, आदेश जारी’

आरामदायक’ स्थानों पर तैनात पुलिस कर्मियों को लगा झटका

भोपाल, (ओपी तीसरे)। डीजीपी विवेक जौहरी ने आदेश जारी किए हैं कि अब प्रतिनियुक्ति और स्थानांतरण पीएचक्यू द्वारा किया जाएगा। जिला इकाई और विशेष स्थापना प्रमुखों के पास स्थानांतरण करने या बनाने की शक्ति नहीं होगी। अब, जो लोग प्रतिनियुक्ति पर जाना चाहते हैं या स्थानांतरण प्राप्त करना चाहते हैं उन पुलिस कर्मियों पहले अपने वर्तमान इकाई प्रमुख से अनुमति लेनी होगी। फिर, पीएचक्यू आदेश जारी करेगा।

डीजीपी ने मंगलवार की शाम जो आदेश जारी किया है उसमें कहा गया कि कांस्टेबल से लेकर इंस्पेक्टर तक का तबादला और प्रतिनियुक्ति अब पीएचक्यू ही कर सकता है। डीजीपी ने 2013 में जारी आठ साल पुराने आदेश को बदल दिया था। डीजीपी के इस आदेश से उन पुलिस कर्मियों को झटका लगा है, जो लंबे समय से ‘आरामदायक’ स्थानों पर तैनात हैं। आदेश आर्थिक अपराध शाखा, लोकायुक्त, नशीले पदार्थों, अजाक्स, एसटीएफ, हॉक फोर्स, एटीएस, एससीआरबी, विशेष शाखा, साइबर सेल, खुफिया, प्रशिक्षण केंद्रों और अन्य इकाइयों के प्रमुखों को जारी किए गए हैं।

नए भर्ती किए गए कांस्टेबल और एएसआई के लिए पांच साल की बाध्यता का पालन किया जाएगा। यदि कर्मियों ने प्रशिक्षण और नियत इकाई में पांच साल की सेवा पूरी कर ली है, तो वह स्थानांतरण या प्रतिनियुक्ति पाने का हकदार होगा। एक छूट भी दी जाती है, जिसमें तीन साल की सेवा के बाद किसी को स्थानांतरण मिल सकता है। विशेष रूप से प्रतिनियुक्ति केवल तीन वर्षों के लिए की जा सकती है। एक अपवाद के रूप में प्रतिनियुक्ति को एक और वर्ष के लिए बढ़ाया जा सकता है, लेकिन वह भी केवल विशेष मामलों में। और जब एक कार्मिक प्रतिनियुक्ति पूरा कर लेता है, तो उसे अगले तीन वर्षों तक उसी इकाई में तैनात नहीं किया जा सकता है। प्रतिनियुक्ति की अवधि पूरी होने के तुरंत बाद कर्मियों को भी रिलीज कर दिया जाएगा। डीजीपी के आदेश उन कर्मियों के लिए एक गंभीर समस्या पैदा करने वाले हैं, जो सालों से अपनी इकाइयों में तैनात हैं। उनमें से कुछ ने तो एक ही इकाई से सेवानिवृत्ति लेने की योजना भी बनाई थी।

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