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रीवा में भी ब्लैक फंगस की दस्तक, पाए गए 12 मरीज

कलयुग की कलम

रीवा में भी ब्लैक फंगस की दस्तक, पाए गए 12 मरीज

कलयुग की कलम

रीवा, (ओपी तीसरे)। कोरोना की दूसरी लहर से जूझ रहे रीवा जिले में खतरनाक ब्लैक फंगस ने दस्तक दे दी है अब तक जिले में 12 मरीजों की पुष्टि हो चुकी है, जिसमें एक सतना जिले की महिला भी शामिल है। जबकि एक मरीज को इलाज के लिए भोपाल भेज दिया गया है।
इलाज में जुटे डॉक्टरों की मानें तो लगातार मरीजों की देखरेख की जा रही है। टाउन के स्वास्थ्य पर नजर रखी जा रही है। उनका इलाज श्याम शाह मेडिकल कॉलेज रीवा के रिसर्च सेंटर संजय गांधी अस्पताल के डॉक्टरों द्वारा किया जा रहा है। इन मरीजों के लिए अलग से एक यूनिट बनाए जाने के आदेश शासन से प्राप्त हो चुके हैं, जिसे जल्द शुरू करा दिया जाएगा। इस तरह का दावा प्रशासन करता घूम रहा है। बताया जा रहा है मरीजों का एसपीओ 2 लेवल तेजी से गिरता जा रहा है। अनुभवी डॉक्टरों द्वारा उनके स्वास्थ्य पर नजर रखते हुए लगातार पूरे मामले तथा स्वास्थ्य संबंधित समस्त जानकारी मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ. मनोज इंदुलकर को उपलब्ध कराया जा रहा है।

ब्लैक फंगस यानी म्यूकारमायकोसिस कोरोना

संक्रमण की सबसे खतरनाक स्टेज मानी जा रही है। इस ब्लैक फंगस के चलते आंखों की रोशनी जाना सबसे डरावना परिणाम है। ये फंगस दिमाग-आंख की नसों में खून के बहाव को अवरुद्घ कर जानलेवा भी साबित हो रहा है।

35 से 50 साल वालों में नजर आया लक्षण

जिले में ब्लैक फंगस के जो मरीज सामने आए हैं, उनकी उम्र 35 से 50साल के बीच रही है। उम्र का ये आंकड़ा इसलिए भी चौंकाने वाला है, क्योंकि अब तक माना जाता था कि युवास्था में इम्युनिटी पावर अच्छी होती है, जिससे कोरोना से बचाव करना संभव है। लेकिन, ब्लैक फंगस के नए ट्रेंड ने इन बातों को भी झुठला दिया है।

क्या है ब्लैक फंगस ?

म्यूकरमाइकोसिस इंफेक्शन एक गंभीर बीमारी है जो शरीर में बहुत तेजी से फैलती है। जिसे आम बोलचाल की भाषा में ब्लैक फंगस कहा जाता है। ब्लैक फंगस मरीज के दिमाग, फेंफड़े या फिर स्किन पर भी अटैक कर सकता है। इस बीमारी में देश-प्रदेश में कई मरीजों के आंखों की रोशनी जा चुकी है।

और, हो जाती है मौत

ब्लैक फंगस के कारण कुछ मरीजों के जबड़े और नाक की हड्डी के गलने की भी शिकायतें हैं। यदि समय रहते इसे कंट्रोल न किया गया तो इससे मरीज की मौत भी हो सकती है।

ये है लक्षण :-

ब्लैक फंगस एक आंतरिक फंगल संक्रमण है, जबकि त्वचा पर होने वाला फंगल इंफेक्शन मनीसैजरीज, गुच्छे, गांठ या स्किन के बीच दिखता है। इसमें स्किन पर खुजली होती है, लेकिन ट्रीटमेंट लेने से ठीक हो जाता है। जबकि ब्लैक फंगस की चपेट में आने से मरीज की मौत भी हो सकती है।ब्लैक फंगस की शिकायतें अक्सर कोविड रिकवरी के बाद आ रही हैं। इसके कई लक्षण हैं, जैसे दांत दर्द, दांत टूटना, जबड़ों में दर्द, दर्द के साथ धुंधला या दोहरा दिखाई देना, सीने में दर्द और सांस लेने में परेशानी होना आदि। इसके अलावा इसमें व्यक्ति की आंखें लाल होना और पलकों पर सूजन दिखने लगी है।

रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने पर करता है अटैक

ब्लैक फंगस मुख्य रूप से उन लोगों को ज्यादा प्रभावित करता है जो पहले से ही तमाम तरह की स्वास्थ्य समस्याएं झेल रहे हैं और उनकी दवाएं ले रहे हैं। ऐसी स्थिति में मरीज का शरीर कीटाणुओं और बीमारी से लड़ने की क्षमता खो देता है और फंगल इनफेक्शन ऐसे लोगों पर अपना प्रभाव डालना शुरू कर देता है।

बता रहे उपाय

संजय गांधी अस्पताल के चिकित्सकों के अनुसार कुछ सावधानियां रखकर व्यक्ति ब्लैक फंगस से बच सकता है। इसके लिए मधुमेह यानी डायबिटीज से ग्रस्त और कोरोना से ठीक हुए लोगवशुगर पर नजर रखें। स्टेरॉयड के इस्तेमाल में समय और डोज का नियमित रूप से ध्यान रखें या बंद कर दें। आक्सीजन थैरेपी के दौरान स्टेराइज्ड पानी का उपयोग करें। इम्यूनोमॉड्यूलेटिंग दवाओं का इस्तेमाल करना बंद कर दें।

इनका कहना है :-

अब तक कुल 12 संदिग्ध मरीज मिले हैं कि जिसमें 9 की पुष्टि हो चुकी है तथा एक रेफर के सतना से रीवा लाया गया है जबकि दो की रिपोर्ट आना शेष है।
डॉ मनोज इंदुलकर डीन श्याम शाह मेडिकल कालेज, रीवा

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