मध्यप्रदेश

क्या है पन्‍ना जिले की रूंज नदी में शवों के मिलने का सच, ग्रामीणों में हड़कंप 

कलयुग की कलम

 क्या है पन्‍ना जिले की रूंज नदी में शवों के मिलने का सच, ग्रामीणों में हड़कंप

आधा दर्जन लाशें दिखने की अफवाह से ग्रामीणों में मचा हड़कंप का माहौल है।

[[ पन्ना/मध्यप्रदेश ]]

गंगा नदी की तर्ज पर जिले के धर्मपुर थाना अंतर्गत बहने वाली रूंज नदी के नंदनपुर घाट में पानी में उतराती लाशें देखे जाने की खबर ग्रामीण क्षेत्रों में जंगल में लगी आग की तरह फैल गई। अफवाहों में 6 लाशें देखे जाने की बात कही जा रही थी जिससे ग्रामीणों में दहशत का माहौल व्याप्त हो गया था। लोगों को शंका थे कि कहीं ये लाशें कोरोना संक्रमित लोगों की तो नहीं फेंकी गई हैं जिससे पूरे क्षेत्र में कोरोना का संक्रमण हो जाए।

सूचना मिलते ही मौके पर पहुंचे धर्मपुर थाना प्रभारी मैं मामले को गंभीरता से लेते हुए नदी में उतरा रही दो लाशों को देखा और उनके बारे में उन्होंने अपने मुखबिर तंत्र को सक्रिय करते हुए उक्त लाशों के बारे में पता किया तो पता चला कि बगल के गांव में एक वृद्ध की सामान्य बीमारी के चलते मृत्यु हो गई थी जिसको गांव वालों ने अंतिम संस्कार के रूप में पानी में जल समाधि दिला दी थी तथा इसी प्रकार पास के गांव की एक और युवक की मृत्यु कैंसर की बीमारी से हो जाए हो गई थी उसे भी ग्रामीणों द्वारा पानी में बहा दिया गया था

इस बात की पुष्टि धर्मपुर थाना प्रभारी सुधीर कुमार बेगी द्वारा की गई है। उन्होंने बताया कि नदी में सिर्फ दो ही शव मिले हैं। 6 शव देखे जाने की अफवाह है। पुलिस द्वारा शवों को पानी से बाहर निकाल कर अंतिम संस्कार कराए जाने की जानकारी बताई गई है।जानकारी के अनुसार उत्तर प्रदेश की सीमा से लगे ग्राम नंदनपुर की रूंज नदी में अचानक आधा दर्जन लाशें देखने से ग्रामीणों में भय का माहौल बन गया था। थाना प्रभारी द्वारा बताया गया कि नदी में सिर्फ 2 शव ही मिले हैं। फिलहाल लोगों के सामने सही जानकारी आ जाने से राहत की सांस ली।

पुलिस अधीक्षक पन्ना धर्मराज मीणा ने भी यह पुष्टि की है कि नदी में सिर्फ दो ही लाशें मिली हैं जो पास के ही गांव के बुजुर्गों के हैं जिनका कोरोना जैसी घातक बीमारी से कोई लेना देना नहीं है जिन दो लोगों की लाशें मिली है उनकी भी पहचान हो गई है। उनके परिजनों से पूछताछ करने पर पता चला है कि उन दो लोगों की मृत्यु अन्य बीमारी के कारण हुई है। जिनको गांव की परंपरा के अनुसार नदी में जल समाधि दी गई है किंतु नदी में बहाव कम होने के कारण शव नदी के किनारे में लग गए मृतकों में कल्लू अहिरवार 75 वर्ष व शिवबरन अहिरवार 90 वर्ष की है।

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