मध्यप्रदेश

अक्षय तृतीया विशेष घर-घर हवन कर वायुमंडल का शोधन करें ब्राह्मणों द्वारा सत्य धर्माचरण से संसार का होता है कल्याण : राजगुरु

कलयुग की कलम

अक्षय तृतीया विशेष

 घर-घर हवन कर वायुमंडल का शोधन करें

ब्राह्मणों द्वारा सत्य धर्माचरण से संसार का होता है कल्याण : राजगुरु

सतना। लोकरक्षक भगवान परशुराम सदविचार तथा सद्प्रेरणा द्वारा मार्ग-दर्शन देने हेतु अक्षय तृतीया को स्वयं प्रकट होते हैं। ऐतिहासिक काल से ही उनके द्वारा स्थापित की गई व्यवस्था द्वारा भारतीय समाज में समूची हिन्दू जाति एक पिता की संतान की तरह रहती थी। सुविधा की दृष्टि से ब्राम्हण, मानव समाज को संस्कारवान बनाने का कार्य करता था। कोई राष्ट्र की सुरक्षा का दायित्व लेकर क्षत्रिय कर्म करता था, तो कोई भरण-पोषण का उत्तरदायित्व संभालते थे और कोई सेवा-साधना के कार्य करते थे। इसी संगठन की शक्ति ने भारत राष्ट्र को अपराजेय कर रखा था। लोकरक्षक भगवान परशुराम चिरंजीवी होने के साथ-साथ संयमित जीवन यापन करने की शिक्षा देते हैं। उन्हीं के बताए मार्गदर्शन के अनुसार हमारी आंतरिक व्यवस्था भी थी। जब तक संयमी व सेवाशील समाज सुधारकों की कमी न रही। हमारा भारत राष्ट्र विश्व का सिरमौर रहा। इस महान सांस्कृतिक गरिमा के धूमिल होने का एक मात्र ही कारण रहा हमारा आपस में विघटन। भगवान परशुरामजी द्वारा अस्थापित मानदंड था कि संगठन और जातीय एकता, शक्ति और सुरक्षा के आधार हैं।

दीनता, भय, आलस्य छोड़कर ब्रह्मतेज को जाग्रत करें”

लोकरक्षक भगवान परशुराम का संदेश है कि ब्राह्मण मानव समाज से जितने अनुदान लेता है, उससे अनेक गुने अनुदान ज्ञानदान तथा सेवा साधनों के रूप में समाज को देते रहे। दीनता, भय, आलस्य और अकर्मण्यता छोड़कर अपने ब्रह्मतेज को जाग्रत करने हेतु साधना करें।ब्रह्मतेज नष्ट हो जाने से ब्राह्मण की बुद्धि दूषित हो जाती है और भूसुर कहा जाने वाला ब्राह्मण असुरों जैसे आचरण करने लगता है। इसलिए हे ब्राह्मणों ! दीनता को छोड़कर इस दुर्भाव से मुक्ति पाओ।क्योंकि ब्राह्मणों द्वारा सत्य धर्माचरण से संसार का कल्याण होता है। तुम स्वयं विद्या की बृद्धि करो, स्वाध्याय करो और धर्म का प्रचार करो। तुम्हें स्वयं गुण, कर्म और स्वभाव की दृष्टि से दूसरों के सामने उच्च आदर्श उपस्थित करने होंगे। तुम्हारा कर्तव्य है घर-घर जाकर जन-जन में सच्ची धार्मिक चेतना जागृत करो। सत्य व्रत के पालन से ही तुम्हारी प्रतिष्ठा बढ़ेगी और तभी समाज के श्रद्धायुक्त सहयोग से सारे अभाव मिट जाएंगे और आप पुनः तेजस्वी जीवन जीने लगेंगे। इस प्रकार अन्य सब मनुष्य भी सत्य व्रत के साधक बन श्रम के प्रति सम्मान का भाव जागृत करते हुए घर-घर में हवन करें। इस तरह से निश्चित रूप से हम सब राष्ट्र का कल्याण कर सकते हैं। बेशक, इसमें कुछ भी संदेह नहीं।

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