मध्यप्रदेश

विधायक जुगुल कक्का अब हमारे बीच नहीं रहे

कलयुग की कलम

विधायक जुगुल कक्का अब हमारे बीच नहीं रहे

सतना, (कलयुग की कलम)। भारतीय जनता पार्टी के व्योवृद्ध विधायक जुगुल किशोर बागरी का आज उपचार के दौरान भोपाल के चिरायु अस्पताल में निधन हो गया। वे 82 वर्ष के थे। वर्ष 2018 में वे सतना जिले की रैगांव विधानसभा की सीट से पांचवी बार विधायक चुने गए थे। कहा जाता है कि पहले के एक-दो चुनाव उन्होंने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर भी लड़ा था और कांग्रेस के उम्मीदवार को कड़ी टक्कर भी दी थी। वर्ष 1990 में वे अपने भतीजे धीरेंद्र सिंह धीरू से चुनाव हार गए थे, लेकिन उसके बाद से वे कोई चुनाव नहीं हारे। वर्ष 2006 में शिवराज सरकार में उन्हे जल संसाधन राज्यमंत्री बनाया गया था, लेकिन उनके एक बयान से खफा शिवराज ने शिक्षा भर्ती घोटाले में बागरी जी के खिलाफ अभियोजन की मंजूरी देकर उनसे इस्तीफा ले लिया था। दरअसल हुआ यह था कि उन्होंने खुद के मंत्री बनाए जाने के सवाल पर कहा था कि वे किसी की कृपा से मंत्री नहीं बने, बल्कि उनके साथ पार्टी के वे तेईस विधायक हैं जो उमाजी के खेमे के है। वास्तव में यह वह दौर था जब उमा समर्थक विधायक उमाजी की वापसी को लेकर पार्टी आलाकमान पर दबाव बनाए हुए और उधर उमा खेमे में सेंध लगाने के मकसद से शिवराज ने प्रकाश सोनकर व जुगुल किशोर बागरी जी को मंत्रीमंडल मे शामिल कर लिया था। बहरहाल जुगुल कक्का अब हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके किस्से बहुत हैं। फिलहाल मुझे आज उनकी जिंदादिली की वही कुछ बातें याद आ रहीं हैं जो उन्हें औरों से अलग करती थीं।*

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