UNCATEGORIZED

खुद का पद त्याग मांगता है जनादेश

कलयुग की कलम

खुद का पद त्याग मांगता है जनादेश

राजनीतिक दल अब दल नहीं गिरोह बन गए हैं । जो सरदार कह दे वही सही । दमोह विधानसभा के उपचुनाव का परिणाम आते ही भाजपा में हाहाकार मच गया है । गिरोह के मुखियाद्वय दलबदलू प्रत्याशी को जनता द्वारा नकार दिए जाने से अपना मानसिक संतुलन खोते दिखाई दे रहे हैं । तभी तो सरकारी मुखिया ने पहले दमोह कलेक्टर को हटाया फिर पुलिस अधीक्षक को भी चलता किया । इसी कड़ी को आगे बढ़ाते हुए गिरोह के मुखिया ने वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्तमंत्री, 7 बार विधायकी कर चुके जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए कार्यकर्ता सिद्धार्थ मलैया, अजय सिंह, संतोष रोहित, मनीष तिवारी, अभिलाष हजारी और देवेन्द्र सिंह राजपूत की प्राथमिक सदस्यता निलंबित कर दी । इस कार्यवाही का समर्थन क्षेत्रीय सांसद ने भी किया ।

सवाल उठता है कि उम्मीदवार की करारी पराजय के लिए कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक कैसे और क्योंकर जिम्मेदार हैं ? चुनावी पराजय के तत्काल बाद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाया जाना यह बताने के लिए पर्याप्त है कि सरकारी मुखिया जनतंत्र की हत्या कराकर जिला प्रमुखद्वय के माध्यम से जीत चाहता था । अधिकारियों का ट्रांसफर सामान्य प्रक्रिया हो सकती है मगर जिस तरह चुनावी पराजय के बाद कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को हटाया गया है वह सरकारी मुखिया की कुत्सित मानसिकता को ही उजागर कर रहा है ।

अब बात आती है खुद को पार्टी विथ डिफरेंट से गटर में तब्दील हो चुके गिरोह की । जिसने गिरोह विस्तार के लिए अनैतिकता की सारी सीमायें पार करते हुए पार्टी कार्यकर्ताओं को अपना जरखरीद गुलाम समझना शुरू कर दिया । पहले तो प्रदेश में सरकार बनाने के लिए जनता द्वारा दिये गए जनादेश का अपमान करते हुए दोपाये जानवरों की मंडी लगाकर खरीद फरोख्त की । फिर प्रदेश को जबरन उपचुनाव में झोखा । उपचुनाव में खरीदे गए दोपायों को उम्मीदवार बनाकर फिर से चुनने के लिए जनता के सामने पेश किया । ये जनता का फैसला है कि वह किसे चुने किसे नकारे । दमोह की जनता ने दलबदलू, बिकाऊ को नकार कर साहसिक परिचय दिया । जिसका सम्मान किया जाना चाहिए मगर नहीं खिसियानी बिल्ली खंभा नोचे की तर्ज पर वरिष्ठ नेता, पूर्व वित्तमंत्री, 7 बार के विधायक जयंत मलैया को कारण बताओ नोटिस ही जारी कर दिया । इतना ही नहीं कार्यकर्ता सिद्धार्थ मलैया, अजय सिंह, संतोष रोहित, मनीष तिवारी, अभिलाष हजारी और देवेन्द्र सिंह राजपूत की प्राथमिक सदस्यता भी निलंबित कर दी । यह घटिया कार्यवाही यह बताने के लिए पर्याप्त है कि प्रदेश प्रमुख की नजर में कार्यकर्ताओं की इज्ज़त गुलामों से भी बदत्तर है । हम जिस भी “एरेगैरेनत्थूखैरे” को कहेंगे कार्यकर्ताओं को अपने बुद्धि विवेक का उपयोग किये बिना सुअर की माफ़िक मुंह नीचे किये उसके लिए काम करना होगा वरना फिर “चित भी मेरा पट्ट भी मेरा और अंटा मेरे बाप का” तो है ही । गिरोह प्रमुख की हरकत भी दमोह के मतदाताओं द्वारा दिये गए जनादेश का घोर अपमान है । जिसमें एक आहुति डालने का काम क्षेत्रीय सांसद ने भी किया है ।

होना तो यह चाहिए था कि कोरोना से बिछी लाशों पर खड़े होकर नृत्य करने से वंचित रह गए सरकारी प्रमुख, गिरोह प्रमुख और सांसद को दलबदलू की पराजय की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए नैतिकता के आधार पर खुद ही त्यागपत्र दे देते वनस्पति कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक का ट्रांसफर करने के, जंयत मलैया, सिद्धार्थ मलैया, अजय सिंह, संतोष रोहित, मनीष तिवारी, अभिलाष हजारी और देवेन्द्र सिंह राजपूत की प्राथमिक सदस्यता निलंबित करने के ।

वैसे इन सब के सिर पर चुनाव के दौरान कोरोना से हुई आधा सैकड़ा मानव हत्या, सैकड़ा भर से ज्यादा मानव हत्या के प्रयास का पाप कर्म भी तो है । इनका पद त्याग कुछ हद तक प्राश्चित बतौर अपराध बोध कम कर सकता है । मगर जिनके मुंह खून के आदी हो चुके हों उनसे ऐसी अपेक्षा बेमानी ही होगी ।

 

अश्वनी बड़गैंया,अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

Related Articles

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Close