मध्यप्रदेश

नेता नहीं नासूर है सत्ता के नशे में चूर है( अशोक शुक्ला वरिष्ठ पत्रका)

कलयुग की कलम

👇🏿नेता नहीं नासूर है सत्ता के नशे में चूर है

कहीं पानी को लेकर हाहाकार मचा है तो कहीं भूख से परेशान मजदूर टावर पर जा चढ़ा है। लेकिन इस विपदा की घड़ी मे भी क्या कहीं कोई नेता आपको परेशान दिखा है ? आखिर क्या वजह है कि हमी आप आपदा के शिकार होते हैं और नेता साहिबान बचे रहते हैं। काश नेताओं जैसा सुरक्षा कवच देश के प्रत्येक आदमी के पास होता। लेकिन शायद यह मुमकिन नहीं है। आखिर नेता, नेता होता है। वह बीमारी, भुखमरी, बेरोजगारी व दुर्भिक्ष जैसी समस्याओं से परे होता है। उसके लिए सभी जरूरी चीजों का खास इंतजाम होता है। तभी तो बड़ी-बड़ी चुनावी रैलियां करने के बावजूद भी वह कोरोना संक्रमण से बचा रहता है।
*अशोक शुक्ला (वरिष्ठ पत्रकार)*

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