मध्यप्रदेश

वास्तविक पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानती शिवराज सरकार

कलयुग की कलम

वास्तविक पत्रकारों को पत्रकार नहीं मानती शिवराज सरकार

(ओपी तीसरे)

मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार सिर्फ अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को ही पत्रकार मानती है। फील्ड में उतरकर पत्रकारिता करने वाले वास्तविक पत्रकार उनकी नजर में सिर्फ और सिर्फ बंधुआ मजदूर के सिवाय और कुछ भी नहीं हैं। सरकार की अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची पर नज़र डाली जाए, तो कथित सूची में ऐसे-ऐसे पत्रकारों के नाम सामने आएंगे, जिनका पत्रकारिता जगत से दूर-दूर तक कोई ताल्लुक ही नहीं होता। हां, ये सिर्फ अपनी चापलूसी, पहुंच व थोड़ी-बहुत पकड़ के दम पर अधिकारियों की जी-हुजूरी करके किसी तरह से अपना नाम कथित सूची में जुड़वा कर अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार का कार्ड जारी करवा लेते हैं और फिर यहां वास्तविक पत्रकारों को नीचा दिखाने का धतकरम भी करते हैं। फील्ड में उतरकर वास्तविक पत्रकारिता करने वाले सरकार की चाटुकारिता नहीं कर पाते, शायद इसलिए उनका नाम सरकार की अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों की सूची में नहीं जुड़ पाता।

अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार ही होंगे फ्रंटलाइन वर्कर

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मध्यप्रदेश में अब अधिमान्यता प्राप्त पत्रकारों को फ्रंटलाइन वर्कर का दर्जा देकर यह साबित कर दिया है कि वास्तविक पत्रकार उनके सामने कुछ नहीं लगते। उनकी नजर में सिर्फ और सिर्फ अधिमान्यता प्राप्त पत्रकार सब कुछ हैं।

ओ पी तीसरे संभागीय ब्यूरो चीफ

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