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नहीं रहे आज तक के एंकर रोहित सरदाना

कलयुग की कलम

नहीं रहे आज तक के एंकर रोहित सरदाना

मरणोपरांत श्रद्धांजलि तो बनती है :

पत्रकार बनने के बजाय एक पार्टी, एक खास व्यक्ति के चाटुकार बनकर करोड़ों भारतवासियों को गुमराह करते रहे । उनके मुद्दों को कभी सरकार के सामने नहीं रखा । देशहित में सत्ता से कभी सवाल नहीं किया । चाटूकारिता करते – करते पंचतत्व में विलीन होने चले गए ।

अगर इनने और इन जैसों ने सही चीज का साथ दिया होता, सही मुद्दे उठाये होते तो आज मौत के इस खेल में उनका नाम नहीं होता मगर अफसोस…..।

काश ये लोग मोदी भक्ति के बजाय कोरोना महामारी पर फोकस डालते मग़र नहीं । दिन रात मोदी भक्ति और उसके चुनाव प्रचार में ही लगे रहे ।

भारत की महानता है यहां से जो भी परलोक गमन करता है सीधा स्वर्गवासी ही होता है । मानवता के नाते विनम्र श्रद्धांजलि ।

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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