मध्यप्रदेश

युवा साथी पत्रकार भाई संजय सांधेलिया की मौत साधारण नहीं है ।

कलयुग की कलम

युवा साथी पत्रकार भाई संजय सांधेलिया की मौत साधारण नहीं है ।

संजय की मौत के लिए जिम्मेदार शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि हैं । यह कहा जाय कि यह संजय की हत्या है तो अतिश्योक्ति नहीं होगा । अस्पताल में संजय को जिस तरह से प्रताड़ित होना पड़ा सभी पत्रकारों को मालूम है । कितनी अनुनय विनय के बाद संजय का ट्रीटमेंट शुरू हुआ किसी से छिपा नहीं है । शासन, प्रशासन और जनप्रतिनिधि पत्रकारों को भावनात्मक ब्लैकमेल करने पर लगे हुए हैं । पत्रकारों से कहा जाता है कि नकारात्मक खबरों को प्रकाशित नहीं किया जाय । उनके घिनौने और दागदार चेहरों को समाज के सामने न लाया जाय । हमारी बिरादरी भी इनके झांसे में आकर जमीनी हकीकत की जगह विरुदावली का गायन कर रही है । जो कि पत्रकारिता के माथे कलंक है । संजय को सही मायने में श्रद्धांजलि तभी होगी जब पत्रकार शासन, प्रशासन, जनप्रतिनिधियों की विरुदावली का गायन छोड़कर मैदानी हकीकत को उजागर करेंगे । वरना आज हमने एक साथी खोया है कल दूसरा खोयेंगे । कोई भैया नहीं, कोई साहब नहीं ।

संजय को विनम्र श्रद्धांजलि ।

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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