मध्यप्रदेश

साप्ताहिक समाचार पत्रों जैसा दम फिलहाल दैनिकों में नहीं

कलयुग की कलम

साप्ताहिक समाचार पत्रों जैसा दम फिलहाल दैनिकों में नहीं

पत्रकार वही होता है जिसके पास समाचार होता है। आप सबकी जानकारी के लिए यह बताना आवश्यक है कि मध्यप्रदेश में हुए व्यापमं घोटाले का समाचार सबसे पहले एक साप्ताहिक समाचार पत्र ने प्रकाशित किया था, जिसका असर यह हुआ कि बड़े कहलाने वाले समाचार पत्रों को मजबूरी में व्यापमं के समाचारों का प्रकाशन करना पड़ा। यदि साप्ताहिक समाचार पत्र में व्यापमं में हुए घोटाले का समाचार प्रकाशित नहीं होता, तो बड़े बैनर के समाचार पत्र व्यापमं में हुए घोटाले को दबा देते। पत्रकार न तो छोटा होता है और न ही कोई बड़ा। पत्रकार सिर्फ पत्रकार होता है। इसलिए मेरा उन सभी साथियों से अनुरोध है कि वह अपने को कभी किसी से कम नहीं आंके। अक्सर प्रेस कान्फ्रेंस में यह देखा जाता है कि किसी बड़े समाचार पत्र में नौकरी करने वाला पत्रकार किसी साप्ताहिक समाचार प्रकाशित करने वाले पर हावी होने का प्रयास करता है। भले ही बड़े बैनर के जुड़े लोग अपने को बड़ा पत्रकार समझते हों, पर आखिरकार वे संस्थान के नियमों से बंधे हैं और अपने मालिकों द्वारा निर्धारित पालिसी के विरुद्ध जाकर समाचार का प्रकाशन नहीं कर सकते। जबकि साप्ताहिक समाचार पत्र प्रकाशित करने वाला एक सही समाचार प्रकाशित कर सकता है। वह सही समाचार को प्रकाशित करने में कोई परहेज नहीं करता। इसलिए मेरा सभी पत्रकारों भाइयों से अनुरोध है कि वे अपने मन में कभी यह भावना न लाएं कि वह किसी से पत्रकारिता के क्षेत्र में कमजोर हैं। हां, सर्कुलेशन बड़े बैनर से कम हो सकता है, पर ऐसे समाचारों को उचित माध्यम से पहुंचाने में साप्ताहिक समाचार पत्र सबसे आगे रहते हैं।

Related Articles

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Close