मध्यप्रदेश

ज्यादा आक्सीजन लेने वाले मरीजों को उच्च संस्थान में रेफर करने का फैसला कितना उचित ?

कलयुग की कलम

ज्यादा आक्सीजन लेने वाले मरीजों को उच्च संस्थान में रेफर करने का फैसला कितना उचित ?

आज शहर से प्रकाशित पत्रिका ने एक बड़ी ही रोचक खबर दी है। खबर में बताया गया है कि ज्यादा आक्सीजन लेने वाले मरीजों को यहां से उच्च संस्थानों में रेफर करने का फैसला किया गया है। एक तरह से यह उन मरीजों के लिए चेतावनी है जो सतना में ही रह कर इलाज कराना चाहते हैं। बहरहाल वकौल सतना कलेक्टर अब जिन्हें जिला अस्पताल में रहकर इलाज करवाना है, वे कम आक्सीजन लेना शुरू कर दें … अन्यथा यहां से बाहर जाने की तैयारी कर लें। दिलचस्प बात यह है कि मरीजों को यहां से अन्य स्थान के लिए रेफर करने के लिए जो मापदंड माननीय कलेक्टर महोदय ने तय किए हैं, वह आसानी से किसी के भी गले नहीं उतर रहे हैं। आखिर कोई पेशेंट कम-ज्यादा आक्सीजन लेने के आधार पर एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल कैसे भेजे सकते हैं ?

डा. आशीष जैन ने कहा डीएम का फैसला सही

इस संबंध में शहर के नामचीन सर्जन डा. आशीष जैन ने कलेक्टर के फैसले का समर्थन करते हुए कहा कि यदि किसी एक या दो पेशेंट को ज्यादा आक्सीजन की आवश्यकता है, तो उन्हें बड़े संस्थानो में रेफर करके कम आक्सीजन की जरुरत वाले मरीजों को बचाया जा सकता है। संभवतः कल जिले के मुखिया ने इसी एक बात को ध्यान में रखते हुए अधिक आक्सीजन लेने वाले रोगियों को उच्च संस्थानो मे रेफर किए जाने का सुझाव दिया होगा। अब सवाल यह उठता है कि जिले के सर्वाधिक निकट का उच्च चिकित्सकीय संस्थान रीवा मेडिकल कालेज क्या नये मरीजों की देखभाल करने की स्थिति मे है ?

पूर्व मंत्री राजेंद्र शुक्ला जी ने क्या कहा ….

इस प्रश्न के उत्तर में रीवा के विधायक एवं पूर्व खनिज मंत्री राजेंद्र शुक्ल ने कहा कि रीवा मेडिकल कालेज अपनी क्षमता से अधिक काम कर रहा है। कोरोना संक्रमितों की बढती संख्या के बीच संसाधनों की कमी का सामना रीवा मेडिकल कालेज भी कर रहा है। इसलिए बेहतर तो यही होगा कि जिलों मे ही इलाज के उचित प्रबंध किए जाएं।

Related Articles

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Close