मध्यप्रदेश

कलेक्टर के निर्देश मात्र औपचारिक !

कलयुग की कलम

कलेक्टर के निर्देश मात्र औपचारिक !

खास को तबज्जो – आम को दुत्कार

पसरी पड़ी है चारों खूंट अव्यवस्था

अस्पताल प्रमुख की बाग़डोर किसी सीनियर के हाथ सौंपी जानी चाहिए

अपनी योग्यता नहीं बल्कि अपनी चापलूसी की बदौलत अपने सीनियर्स को दरकिनार कर जिला अस्पताल के प्रमुख की कुर्सी हथियाने वाले डॉक्टर की अयोग्यता कोरोना संकट के समय खुलकर सामने आने लगी है ।

जिला अस्पताल की सारी व्यवस्थायें ध्वस्त होती जा रही हैं । अराजकता हावी हो चली है । आम मरीज़ ईलाज के लिए मारे – मारे इधर से उधर फ़िर रहा है । मग़र उसकी सुध लेने वाला कोई नहीं है ।

अस्पताल प्रमुख द्वारा नेताओं की सिफ़ारिश पर मरीज़ भर्ती किये जा रहे हैं । कलेक्टर द्वारा अस्पताल का निरीक्षण तथा अस्पताल प्रबंधन को दिए जा रहे रस्मअदायगी बनकर रह गए हैं । प्रशासनिक अधिकारियों का दिमाग़ सातवें आसमान पर है ।

और हो भी क्यों नहीं ! पहले से ही दरबारी बन चुके मीडिया ने अब तो चाटूकारिता की हदें पार करते हुए ज़मीनी हक़ीक़त बयां करने के बजाय अनुनय विनय की भाषा में समाचार छापना शरू कर दिया है ।

नेताओं को भी मालूम है कि चंद सिक्कों का लालच देकर मीडियाकर्मियों की भीड़ इकट्ठी की जा सकती है और अपनी विरुदावली का गायन भी कराया जा सकता है ।

यही कारण है कि अब मीडियाकर्मियों को भी अपने, अपने परिजनों के ईलाज के लिए भी नेताओं की सिफारिश लगवानी पड़ रही है कारण सभी को मालूम है ! अब तो अस्पताल प्रमुख भी मीडियाकर्मियों को दुत्कारने लगा है ।

जिला अस्पताल में पसरी अवस्थाओं की खबरें अस्पताल में ईलाज के लिए भर्ती मीडियाकर्मियों द्वारा बाहर भेजी जाने लगी हैं । जरूरत है मीडिया द्वारा चाटूकारिता छोड़कर मैदानी हक़ीक़त को आमजन के सामने उज़ागर करने की ।

और यह काम गैर सरकारी पट्टाधारी मीडियाकर्मियों को ही करना पड़ेगा । शासन, प्रशासन और सफेदपोशों के एहसानों तले दबे सरकारी पट्टाधारी मिडियाकर्मियों से तो होने से रहा !

 

अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता

स्वतंत्र पत्रकार

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