मध्यप्रदेश

विन्ध्य प्रदेश के संदेश वाहक बनने हेतु स्वयं को तैयार करें

कलयुग की कलम

विन्ध्य प्रदेश के संदेश वाहक बनने हेतु स्वयं को तैयार करें

सतना। समूचे विंध्य को मुक्त करा कर श्रेष्ठ वातावरण विनिर्मित कराने हेतु विंध्य प्रदेश का समूचा जनमानस संकल्पित है।राष्ट्र में चल रही गतिविधियों को देख कर उन सभी का यह संकल्प साकार होता भी दिखाई दे रहा है। यह भी सुनिश्चित है कि आगामी वर्षों में जब विंध्य प्रदेश की लाली जन-जन को दृष्टिगोचर होने लगेगी, तब शासन-सत्ता के चिंतन प्रक्रिया में आमूलचूल परिवर्तन लाने वाली यहां की देव संस्कृति, ऋषि संस्कृति, सनातन संस्कृति ही उसका आधार बनेगी। विंध्य के समूचे जनमानस में आज भले ही व्यापक आधार पर जनाक्रोश न दिखता हो, पर समूचे राष्ट्र में विंध्य प्रदेश बनने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। इसके लक्षण भी अब स्पष्ट दिखाई दे रहे हैं।

“भारत रूपी हृदय की विंध्य रक्तवाहनी”

पुनरोदय विंध्य प्रदेश तभी होगा जब भाव संवेदना रूपी रक्त-संचार यथावत होता रहेगा। राष्ट्र के विभिन्न अंचलों में रह रहा यहां का हर वो व्यक्ति सच्चा राजदूत कहा जाएगा जो विंध्य के निमित्त अपना तन-मन अर्पण करेगा।हालांकि समूचे विंध्य परिवार की संगठनात्मक प्रक्रिया आरम्भ हुए विगत के कई वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी इस पुनर्गठन वर्ष में अश्वमेघिक आयोजन कर प्रथम पूर्णाहुति देनी आवश्यक है जिससे यह विराट विंध्य परिवार एक साथ होकर विंध्य प्रदेश के अस्तित्व में मील का पत्थर साबित हो सके। जिससे हमारा विंध्य हमें लौटा दो की अपरिमित सम्भावनाएं दृष्टिगोचर हो सके।

“देवत्व की प्रेरणा एवम दैवी अनुकम्पा की भूमि”

विंध्य की धरा देवभूमि है। यहां दिन-रात देवत्व की प्रेरणा एवं दैवीय अनुकम्पा बरसती है। चूंकि भौतिक लाभों को सिद्धियों के रूप में जाना जाता है जो संकटों के निवारण और प्रगति के अनुकूलन में सहायक सिद्ध होती हैं। उस आधार पर जो मिलता है उसे वरदान कहा जाता है। समूचा विंध्य प्रदेश तपोस्थली है। अतः इसका वास्तविक लाभ यही है कि हम यहां की देवत्व विभूतियों को जीवनचर्या में समावेश करें। जिस धरा पर श्रीराम जानकी ने 11 वर्ष 7 माह बिताएं हों, वहां निश्चित ही देवता बसते रहे होंगे और जहां देवता बसते रहे होंगे वहां निश्चित ही स्वर्ग रहा होगा। इसी तथ्य के आधार पर अपेक्षा की गई है कि स्वर्णिम विंध्य प्रदेश देवत्व के रूप में अवतरित हों। इसके लिए आप जैसी अवतारी शक्तियां पहले अवतरित हों जो साहस और प्रयास के साथ अग्रिम मोर्चे को संभालते दिखाई दें।

राजगुरु मनोज अग्निहोत्री

मो.9630918559

Related Articles

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Close