मध्यप्रदेश

ऐसे में भला कैसे जीतेंगे ‘कोरोना’ से जंग ? 

कलयुग की कलम

ऐसे में भला कैसे जीतेंगे ‘कोरोना’ से जंग ?

(कहो तो कह दूं : ओपी तीसरे) –

कोरोना संक्रमण की विस्फोटक स्थिति को देखते हुए क्या रणनीति बदलने का समय नहीं आ गया है ? आज जब हम केजीएमसी जैसे कॉलेज और बलरामपुर जैसे अस्पतालों को अन्य सभी तरह की चिकित्साओं के लिये बन्द करके पूरी तरह से कोविड चिकित्सा के लिए बदलते जा रहे हैं, तो क्या हमें चिकित्सा जगत के सर्वकालिक सिद्धांत को नहीं अपनाना चाहिए ?

“Commonest cause is the most probable diagnosis “

और इस समय खाँसी, जुखाम, बुखार और सांस फूलने का सबसे बड़ा कारण कोविड 19 संक्रमण ही है। फिर हम क्यों इन लक्षणों के मरीज़ों को तब तक कोविड 19 से ग्रसित होना मानने से इंकार कर रहे हैं। जब तक कि आरसीपीआरटी रिपोर्ट पॉज़िटिव नहीं आ जा रही है। रिपोर्ट का हाल ये है कि आने में पांच से सात दिन तक लग रहे हैं। सभी पॉज़िटिव मरीज़ों को भर्ती करने के लिए हमारे अस्पतालों मेंं बेड नहीं हैं। क्या समय नहीं आ गया है कि हम कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग के लिए इस तरह की जांचों को कराना बन्द करा दें। सिर्फ़ उपरोक्त लक्षण वाले मरीज़ों की ही जांच कराई जाए, जिससे जांच केंद्रों पर बढ़ता दबाव कम हो सके। जब हमारे पास मरीज़ों को आयसोलेट करने के संसाधन ही नहीं रह गये हैं, तो इस तरह की जांचों को आधार कार्ड, फ़ोन नम्बर और घर के पते से अनिवार्य रूप से जोड़ने और तीन से चार सरकारी केन्द्रों को सूचित करने का कोई औचित्य ही नहीं रह जाता है। हाँ, औपचारिकताएं पूर्ण करने के ये कार्य कार्यकुशलता को धीमा करने के कारक ज़रूर बनते जा रहे हैं।

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