मध्यप्रदेश

नेताओं और पुलिस का आचरण तो सबको पता है मग़र आम आदमी की उम्मीदों का दिया जलाये रखने वाली न्यायपालिका की ख़ामोश अनदेखी आखिर क्यों !

कलयुग की कलम

नेताओं और पुलिस का आचरण तो सबको पता है मग़र आम आदमी की उम्मीदों का दिया जलाये रखने वाली न्यायपालिका की ख़ामोश अनदेखी आखिर क्यों !

कलयुग की कलम

पुलिस अपने चरित्र के मुताबिक ग़रीब की लुगाई सारे गांव की भौजाई बने रिक्शा चालक को सरे आम बीच सड़क बेरहमी से धुनती रही, उसका लड़का पुलिस कर्मियों से गुहार लगाता रहा और तमाशबीन वीडियो बनाते रहे । घटना इन्दौर की है । वीडियो वायरल किया गया । पुलिस अफसरों को मामला तूल पकड़ने का अंदेशा हुआ तो पुलिस कप्तान ने पुलिस कर्मियों को सस्पेंड करने की औपचारिकता निभाई । आगे क्या होगा सबको पता है ! अपराधियों से गलबहियां, सफ़ेदपोशों की चौखट पर माथा टेकने वाली पुलिस से मानवीय संवेदनाओं की उम्मीद करना तो बेमानी ही है । आम आदमी की क़ीमत एक वोट से ज़्यादा नहीं आंकने वाले नेताओं से तो वैसे भी मानवीय संवेदनाओं की उम्मीद करना बेकार है । सबसे अधिक दुःखद और शर्मनाक पहलू यह है कि अधिवक्ताओं और निष्पक्ष पत्रकारों की टिप्पणियों को अपनी अवमानना मानकर स्वमेव संज्ञान लेने वाली न्यायपालिका की मानवीयसंवेदना भी मर गई है । यदि ऐसा नहीं है तो अभी तक न्यायालय ने स्वमेव संज्ञान क्यों नहीं लिया । जबकि वहां तो हाईकोर्ट की खण्डपीठ तक स्थापित है । यदि वाकया किसी हाईप्रोफाइल के साथ हुआ होता तो शासन, प्रशासन लेकर न्यायपालिका तक ने आसमान सिर पर उठा लिया होता । पीटने वाले प्यादे तो दूर हाथी, घोड़ा, ऊंट सहित वज़ीर पर गाज गिर चुकी होती । मग़र ऐसा इसलिए नहीं हुआ क्योंकि मार खाने वाला वो आम आदमी था जिसकी नियति ही ज़लील होने की है । अगर उस व्यक्ति ने आवाज़ उठाई तो उस पर इतने फ़र्जी केस दर्ज़ कर दिए जायेंगे कि उसकी सात पुश्तें तक नहीं_ उबर पायेंगी । सुलगता सवाल यह है कि_ दिये के साथ दिखकर हवा के साथ होने वाली पुलिस को यह अधिकार दिया किसने है कि वह मास्क नहीं लगाने वाले के साथ गालीगलौज करे, मारपीट करे, वाहन की चाबी छीन ले । पुलिस की यह हरकत तो शुद्ध गुंडागर्दी, अवैधानिक है । इसे पुलिस की रजिस्टर्ड गुंडागर्दी भी कहा जा सकता है । वैसे पुलिस का यह चरित्र पूरे देश की पुलिस का है । देश भक्ति जनसेवा के स्लोगन पर पुलिसिया बदचलनी ने कालिख़ पोत रखी है ।

चलते – चलते

पुलिस का स्याह चेहरा

कटनी का उपनगरीय क्षेत्र माधवनगर

चार लड़के 12 – 13 साल आयु वर्ग के बिना मास्क लगाए साधारण सी साईकल से जा रहे थे । स्वाभाविक है लड़के ग़रीब परिवार से ताल्लुक रखते हैं । चौराहे पर खड़े पुलिस कर्मियों की उन पर नज़र पड़ती है । एक पुलिस कर्मी अपने चरित्रानुसार मातृ, भगनी प्रेम दर्शित करते हुए मास्क नहीं लगाने पर बतौर जुर्माना सौ सौ रुपये की मांग करता है । नंगे रहें नचोये क्या की हालत वाले लड़के हाथ पांव जोड़कर चिरौरी विनती करने लगते हैं । मग़र पुलिस वाले पर कोई असर न होना था और न ही हुआ । पुलिस चरित्तर की समझ रखने वाले लडक़े एक किनारे जाकर अपनी जेब में रखे दस – बीस रुपये इकट्ठा कर पुलिस वाले के हाथ में थमा देते हैं । पुलिस वाला भी बंधी मुठ्ठी को पेंट की जेब में खोल देता है । चलो भगो यहां से, कल से बिना मास्क के मत घूमना का रावणी ज्ञान देते हुए कुटिल मुस्कान के साथ साथियों सहित अगले शिकार के लिए मुस्तैद हो जाता है ।

ऐसे वाकये हर गांव – शहर में आमतौर पर देखे जा सकते हैं ।

 

कटनी से लेखक अश्वनी बड़गैंया, अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार की खास रिपोर्ट

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