उत्तरप्रदेश

डॉक्टरी का व्यवसाय धन कमाने के लिए नहीं जन सेवा के लिए भी : निधि पाण्डेय ,रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज

कलयुग की कलम

प्रयागराज। प्रत्येक इंसान की अपनी अपनी रुचि होती है। सभी इंसान एक समान नहीं होते हैं। सभी इंसान अपनी-अपनी रुचि के अनुसार जीवन में कुछ करना चाहते हैं। जीवन में कुछ करके दिखाना चाहते हैं। सभी अपने लक्ष्य निर्धारण करते हैं। निधि पाण्डेय अभी कक्षा 11वीं के परीक्षा में अपने विद्यालय में तृतीय स्थान पर रही तथा विगत 12 वर्षों से अनवरत अपने क्लास में प्रथम या द्वितीय स्थान पर ही रहने का रिकार्ड कायम रखने में कामयाब रही है। पीडब्ल्यूए्स प्रमुख आर के पाण्डेय की छोटी पुत्री निधि पाण्डेय ने अपने मन की भावना व्यक्त करते हुए मीडिया को बताया कि मैं सोचती हूँ यदि मैं डॉक्टर बन जाऊं तो मेरा लक्ष्य होगा जन सेवा। मैं किसी ऐसे गाँव और क्षेत्र में अपना अस्पताल खोलूँगी जहाँ चिकित्सा की बहुत जरूरत होगी। उस अस्पताल में सभी प्रकार के चिकित्सा के उपकरण रहेंगे। इससे गाँव के लोगों को इलाज के लिए गाँव से बाहर न जाना पड़े। मेरे अस्पताल से ही उनकी चिकित्सा संबंधी सारी आवश्यकताएँ पूरी हो जाएं। हर व्यवसाय में धन की आवश्यकता होती हैं और धन की जरूरत पड़ती है । डॉक्टरी का व्यवसाय मैं केवल धन कमाने के लिए नहीं करूंगी। मैं यह भी जानती हूँ कि बिना धन के काम नहीं चल सकता इसलिए मैं धनवान व्यक्तियों से तो चिकित्सा के पूरे पैसे लूंगी और साथ ही गाँव के गरीबों का इलाज मुफ्त में करूंगी। मैं डॉक्टर बन जाती हूँ तो मैं अपना कार्य पूरी जिम्मेदारी के साथ करूँगी। चिकित्सा का काम व्यवसाय नहीं है इसलिए केवल पैसा कमाना ही मेरा उद्देश्य नहीं होगा। मेरे जीवन का लक्ष्य ही है मानव सेवा समाज सेवा धन कमाना नहीं। मुझे विश्वास है कि मैं अवश्य डॉक्टर बनूँगी। मैंने जो संकल्प किया है, उसे पूरा करके दिखाऊँगी । मेरे आदर्श मेरे पिता आर के पाण्डेय एडवोकेट है। माँ मनीषा पाण्डेय मेरी ज्ञान कीकुंजी व मेरी बहन दिव्या पाण्डेय मेरी शक्ति। पीडब्ल्यूए्स परिवार के सभी विद्वानों का आशीर्वाद ही मेरी ताकत है। निधि पाण्डेय का विश्वास है कि एक साथ इतनी सारी ताकतें होने के बाद लक्ष्य भेद पाना बिल्कुल ही मुश्किल नहीं है।

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