मध्यप्रदेश

आओ लात खायें . . . हुजूर के गुण गायें

कलयुग की कलम

आओ लात खायें . . . हुजूर के गुण गायेंं

कलयुग की कलम

क्या हमारा देश कानून के मुताबिक चलता है ? या फिर इस मुल्क का कानून अधिकारियों के मुताबिक चल रहा है ? सवाल कठिन है। लिहाजा आईए जवाब तलाशने की कोशिश करते हैं। फिलहाल कोरोना संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिये बनाए गए नियम कानूनों के मामले में हम यह कह सकते हैं कि इस मुल्क में कानून अधिकारियों के मन मुताबिक चलता है। दरअसल बीते अड़तालिस घंटो के दौरान कोरोना संक्रमण की रोकथाम के लिए प्रशासनिक अमले द्वारा बरती गई सख्ती सवालों के घेरे में आ गई है। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि जहां मास्क और सोशल डिस्टेंसिंग के मामलों में लापरवाही बरतने वाले आम आदमी को गिरफ्तारी जुर्माने और लात-घूंसो से नवाजा गया है, वहीं नियम कायदों का रोज उल्लंघन करने वाले नेता और सरकारी कर्मचारी अब तक बचे हुए हैं। कल इंदौर मे मास्क न लगाने वाले एक रिक्शा चालक को वगैर मास्क लगाए हुए दो पुलिस कर्मी पीट रहे थे। यद्यपि इस घटना का वीडियो वायरल होने के बाद दोनों पुलिस कर्मियों को निलंबित कर दिया गया है। जबकि रीवा में मास्क न लगाने वाले 40 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर लिया गया। इसके अलावा बैतूल के एक बैंक के बाहर लाइन में लगे दर्जनों लोगों पर जुर्माना भी ठोंक दिया गया। लेकिन दूसरी तरफ कोरोना संक्रमण को रोकने के लिये जारी दिशा निर्देशों का उल्लंघन करने वाले सरकारी अमले को साफ तरीके से बख्श दिया गया। मालूम हो कि सतना से प्रकाशित एक दैनिक समाचार पत्र ने तस्वीरों के साथ इस खबर को प्रकाशित किया है कि सरकारी अमला कोरोना के मामले में ‘मास्क नहीं तो बात नहीं’ का खुलेआम उल्लंघन कर रहा है। खैर अब अजब देश की गजब व्यवस्था का मजा लीजिए और यह समझ लीजिए कि जब हम लोग भूख से नहीं मरे, हुजूर की घूंस से नहीं मरे, साहब जैसे नेताओं के झूठ से नहीं मरे हैं, भला तब कोरोना हमारा क्या बिगड़ लेगा। दरअसल मुश्किल हालातों में भी जिंदा रहने की हमारी काविलियत ने हमें लतियल बना दिया है।

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