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हमें लौटा दो हमारा विंध्य

कलयुग की कलम

हमें लौटा दो हमारा विंध्य

नारायण का अभियान अकेले चलो, घर-घर मिलो

सेहत की चिंता से कई आंदोलनकारी नहीं निकल रहे

सतना, (ओपी तीसरे)। रफ्तार पकड़ रहे हमें लौटा दो हमारा विंध्य अभियान को कोरोना और सरकार की नजर लग गई। बावजूद इसके मैहर विधायक का जुनून बरकरार है। अभियान के अगुआ विधायक नारायण त्रिपाठी ने प्रारंभ से ही विंध्य की वापसी के लिए आक्रामक रूख अपना रखा है। जिसके लिए वो अपने ही दल भाजपा पर हमला करने से नहीं चूकते। सार्वजनिक तौर पर कई ऐसे भी मौके आए जब उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री पर भी निशाना साधा। भाजपा को पृथक विंध्य का आइना दिखाने के लिए त्रिपाठी अक्सर पार्टी के दिवंगत दिग्गज नेता अटल बिहारी बाजपेई की छोटे राज्यों की अवधारणा को हथियार के तौर पर इस्तेमाल करते हैं। इस विषय पर भाजपा किनारा कर लेती है। वकौल त्रिपाठी अटल जी छोटे राज्यों के पक्षधर थे। उनका मानना था कि छोटे राज्यों में विकास की गति तेज होती है। त्रिपाठी मानते हैं कि अगर विंध्य म.प्र. से अलग राज्य होता तो यहां का विकास कई गुना अधिक होता। म.प्र. में शामिल होने से यहां बेरोजगारी, सड़कें, पर्यटन, उद्योग, खेती और किसान, अधोसंरचना का आपेक्षित विकास नहीं हो सका है।

पहले वर्चुअल फिर घर-घर

विधायक श्री त्रिपाठी ने कोरोना के खतरे को देखते हुए सभा और रैली को स्थगित करने पर सहमति जताई, पर सरकार पर आरोप लगाया कि जहां चुनाव हैं वहां कोरोना नहीं है। लेकिन जहां जनहित की बात होती है वहां कोरोना आ जाता है। उनका यह सियासी तर्क कितना सटीक है यह तो वही जानें, लेकिन उनका जुनून बरकरार है। पहले विकल्प के तौर पर वर्चुअल मीडिया का सहारा लिया। फेसबुक, वाट्सअप पर अभियान का प्रचार किया। विचार विमर्श और जनसमर्थन के लिए पृथक विंध्य की जरूरत को समझाया। अब कोरोना में साथियों की संख्या दौरों में कम होने से गांव-गांव, घर-घर निजी तौर पर संपर्क कर रहे हैं।

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