प्रयागराज

कोरोना संकट को आराम व कमाई के अवसर के बजाय मानवीय सेवा के महान अवसर के रूप में अपनाएं —पीडब्ल्यूएस प्रमुख।रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज

कलयुग की कलम

कोरोना कालीन लूट व भ्रष्टाचार बेहद निंदनीय व शर्मनाक।

राजनैतिक व आराम तलब लोग खुद को सुधारें।

आंदोलन व चुनाव पर प्रश्न?

प्रयागराज। यह बेहद निंदनीय व शर्मनाक है कि विश्वव्यापी कोरोना संकट में भी तमाम लोग व अनेक विभाग इसे केवल कमाई व आराम का बेहतर अवसर बना लिए हैं जबकि कोरोना संकट को बेहतर मानवीय सेवा का महान अवसर बनाया जा सकता है।

आज मीडिया से उपरोक्त बातें करते हुए पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने कहा कि जब कोरोना संकट में सेना, पुलिस, अस्पताल, किराना स्टोर, चुनाव आयोग आदि सभी अनवरत कार्य कर रहे हैं तो मा0 न्यायालयों को बंद क्यों किया गया है? व जब लाखों की भीड़ के साथ राजनैतिक चुनावी सभा एवं हजारों के भीड़ के साथ किसान आंदोलन हो रहे हैं जो शैक्षिक संस्थान बन्द क्यों हैं? सच तो यह है कि कोरोना संकट काल पर न तो सरकार ईमानदारी से कार्य कर रहे हैं व न ही राजनैतिक लोग सुधर रहे हैं जबकि आराम व भ्रष्टाचार करने वालों का बोलबाला है। स्वयं मास्क न लगाने वाले लोग मास्क न लगाने वालों का चालान काटेंगे तो क्या होगा?

बता दें कि विगत एक माह में हरियाणा, दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश सहित अनेक राज्यों का भ्रमण करने के उपरांत अपना अनुभव साझा करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के वरिष्ठ समाजसेवी अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने बताया कि हर जगह केवल अधिकतम चालान काटकर स्वयं व सरकार का जेब भरना चलन बन गया है। बात-बेबात मुद्दाविहीन बकवास करने वाला विपक्ष तक मौन है। उन्होंने पूछा कि आखिर अरबों की संपत्ति वाले कांग्रेस, भाजपा, बसपा, सपा, टीएमसी, भाकपा, माकपा, राजद, जेडीयू आदि दल व उनके नेता कौन सा सेवा प्रकल्प चला रहे हैं? केंद्र के राज्य की सरकारों ने मात्र घोषणाएं की हैं जबकि हकीकत में कोरोना संकट के नाम पर पीएम केयर व सीएम फंड में आये धन का जनहित में उपयोग तक नही किया गया। आखिर जब स्वास्थ्य, सुरक्षा आदि में न तो नई भर्ती हुई व न ही कोई नए कारखाने खुले तो जनता व कटौती के धन संग्रह का सरकारों ने क्या किया? आज भी बिना कमीशनबाजी के आम जनता को बैंक से लोन तक नही मिल रहा है तो दोष जनता का नही बल्कि सिस्टम का है। उन्होंने पूछा कि आखिर प्राइवेट विद्यालयों के मनमानी पर सरकारें खामोश क्यों हैं? जब विद्यालय की बिल्डिंग, फर्नीचर, स्टेशनरी, लाइब्रेरी, प्लेग्राउंड व अन्य संसाधनों का उपयोग विद्यार्थी कर ही नही रहे तो उनकी फीस क्यों ली जा रही है? सरकार ने आन लाइन शिक्षण की स्पष्ट गाइड लाइन क्यों नही जारी की है? आर के पाण्डेय एडवोकेट ने पूछा कि जब किराना, सब्जी, मेडिकल, टैक्सी में आमने-सामने व्यापार व व्यवहार चल सकता है तो कई मीटर की दूरी पर बैठे जज किसी अधिवक्ता की बहस क्यों नही सुन सकते हैं? उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि सच तो यह है कि विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के सिस्टम में बैठे अधिकांश लोगों ने वास्तव में इस कोरोना संकट काल को स्वयं के आराम व कमाई का अवसर बना लिया है या अन्यथा केवल दो ही रास्ते हैं पहला सम्पूर्ण लाकडाउन जिसमे राजनैतिक दल, भीड़ व आंदोलन भी घर में बंद रहें या फिर मास्क, सैनिटाइजर व सोशल डिस्टेंस का बेहद कड़े अनुपालन के साथ सभी कार्य पूर्ववत सुचारू रूप से चलें अन्यथा की स्थिति में राजनैतिक दलों, सरकार व सिस्टम पर सवाल जरूर उठेंगे व जनता का विश्वास उठना भी लाजमी है।

अतएव इससे पहले के जनता का पूरा विश्वास ही उठ जाए आज जरूरी है कि विधायिका, कार्यपालिका, न्यायपालिका व सिस्टम में बैठे लोग स्वयं के बजाय समाजहित, जनहित व राष्ट्रहित का चिंतन करते हुए अपने दायित्व का ईमानदारी से निर्वहन करें तथा अपने सकारात्मक व सक्रिय प्रयास से कोरोनामुक्त विश्व हेतु अपना सर्वश्रेष्ठ योगदान दें।

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