मध्यप्रदेश

सियासी विशेषज्ञों को भी खटकने लगी विन्ध्य प्रदेश की चिंगारी

कलयुग की कलम

सियासी विशेषज्ञों को भी खटकने लगी विन्ध्य प्रदेश की चिंगारी

सतना, (ओपी तीसरे)। एक समय था जब हमारा विन्ध्य अपना स्वतंत्र राज्य था। पिछले करीब 67 वर्ष के दौरान विन्ध्य को पुनः प्रदेश का दर्जा देने के लिए कई तरह के आंदोलन होते रहे। मगर सियासी दृष्टिकोण से विन्ध्य क्षेत्र के लोगों को उनके अपने हित के सवाल पर उठने वाली हर वो आवाजें दबा दी गईं, जो वास्तव में जमीनी नेताओं द्वारा जन कल्याण के लिए उठाई गई थी। लगभग साढ़े दशक बीत जाने के बाद एक बार फिर ‘हमारा विन्ध्य हमें लौटा दो’ के नारे के साथ जन-जागृति की क्रांति अब सामने आई है, जो अपने और आने वाली पीढ़ी के उज्जवल भविष्य को लेकर घर-घर अलग जलाने का काम कर रही है।

मां शारदा के क्षेत्र में एक किसान के घर में जन्मे नारायण नाम की शख्सियत को हाथों-हांथ लेकर इस नेता को चार बार विधायक बनाया। अपना जनप्रतिनिधि चुनने के मामले में मैहर विधानसभा क्षेत्र की जनता ने यह कभी नहीं सोचा कि वे किस पार्टी से हैं। आज यही नेता विन्ध्य को प्रदेश बनाने के लिए संघर्ष कर रहा है। बीते डेढ़ माह से चलाए जा रहे जागरूकता अभियान की सफलता को देख सियासत के जानकार राज्य एवं केन्द्र की सत्ता के निकटतम भविष्य को लेकर तरह तरह की अटकलें जता रहे हैं।

कोरोना गाइडलाईन के साथ सर्वहारा वर्ग मैदान में

अपना भविष्य अपने हाथ के साथ ही जिले की सतना, रामपुर बाघेलान व चित्रकूट आदि क्षेत्रों का भ्रमण कर रहे नारायण त्रिपाठी के इस अभियान को इतनी गति पर पहुंचा दिया है कि गांव-गांव के लोग कोरोना गाइडलाईन का पालन करते हुए खेती-किसानी के इस सीजन में घर-घर पहुंच कर विन्ध्य प्रदेश बनाए जाने की मांग के प्रति समर्थन जुटा रहे हैं। सर्वहारा वर्ग के लोगों ने तो पंचायत स्तर पर अपनी टीम भी बना रखी है। उधर सोशल, इलेक्ट्रानिक एवं प्रिंट मीडिया के जरिए रीवा, शहडोल एवं सागर संभाग में भी इस मुहिम का गहरा असर देखा जा रहा है। जिसके चलते सरकारी खुफिया एजेन्सियां लगातार इस मुद्दे पर नजर बनाए हुए हैं और पल-पल की जानकारी सरकारों तक पहुंचा रही हैं। खुफिया एजेंसी के एक जिम्मेदार अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन का संघर्ष न तो राजनैतिक है और न ही जातिवाद तक सीमित है। इस मामले में चौतरफा आग लगी है। जिसमें बच्चे, युवा, किसान, मजदूर भर ही नहीं बल्कि सभी दलों के नेता भी शामिल हैं। बशर्ते सभी को समय का इंतजार है।

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