मध्यप्रदेश

हवा में बनी है सतना की हवाई पट्टी

कलयुग की कलम

हवा में बनी है सतना की हवाई पट्टी

ओजी एल, एफआरएल, बीटी, बैसकोर्ट एवं पोरसिटी पर उठ रहें कई सवाल

सतना, (ओपी तीसरे)। यहां की हवाई पट्टी को लेकर विधानसभा सहित सियासी स्तर पर उठ रहे तमाम सवालों के बीच राज्य स्तरीय कमेटी द्वारा की गई जांच से अब ऐसा माना जा रहा है कि यह निर्माण हवा में हुआ है। जांच कमेटी के अध्यक्ष प्रमुख अभियंता एआर सिंह द्वारा विभाग प्रमुख एवं शासन को प्रेषित प्रतिवेदन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि ओजीएल (जमीनी सतह), जीआरएल (कच्चा मुरूमीकरण कार्य), बीटी (थीकनैस), बैसकोर्ट एल, पोर सिटी जैसे तमाम कार्यो में गड़बड़ी है।

प्रदेश स्तरीय जांच टीम के अध्यक्ष प्रमुख अभियंता भोपाल एआर सिंह द्वारा अपने विभिन्न पत्र क्रमांक सौंपी गई रिपोर्ट में कार्यपालन यंत्री बीके विश्वकर्मा को जहां एक ही स्थल पर दो कार्य एजेंसी द्वारा कार्य को संदेहास्पद बताया है, वहीं ओएलजी, एफआरएल के अनुमोदन पूर्व, शासन द्वारा निर्धारित निर्देश के विरूद्ध काम कराने, केन्द्रीय प्रदेश विमानन की अनदेखी करने जैसे कई गंभीर आरोप भी लगाए हैं। जांच रिपोर्ट की वास्तविकता को गंभीर माना जाए तो यहां बड़े खतरे की आशंका है।

यह है जांच प्रतिवेदन की सच्चाई

जांच रिपोर्ट ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के अधिकार पर अतिक्रमण करते हुए जहां पुष्पेन्द्र सिंह को सतना संभाग में अटैच करते हुए चर्चित उपयंत्री को नागौद एसडीओ का प्रभार दिए जाने संबंधी लिखित में फरमान जारी कर दिया। यही बात पूर्व मंत्री नागेन्द्र सिंह को नागवार गुजरी। जबकि कानूनी परिप्रेक्ष्य में देखा जाए तो निलंबन पर स्टे आर्डर को निगम की बहाली के साथ उसे ज्वाइन कराने में अधीक्षण यंत्री समेत कई अफसरों ने विभागीय नियमों की सीमाएं तोड़ दी। जबकि स्टे आर्डर को ही अहम् माना जाता तो चर्चित इंजीनियर एके निगम की सिर्फ बहाली हो सकती थी। उधर एक बड़ा सवाल यह भी है कि पिछले कई माह से विवादों में उलझी सतना के कार्यपालन यंत्री की कुर्सी के मामले में हाईकोर्ट द्वारा शासन के उस आदेश को निरस्त क्यों नहीं माना गया जिसमें स्पष्ट तौर पर बीके विश्वकर्मा की जगह एचएन वर्मा को कार्यपालन यंत्री का प्रभार देने के निर्देश दिए गए थे। कोर्ट के आदेशों की अनदेखी करने के इस मामले को पूर्व मंत्री नागेन्द्र सिंह ने सरकार, पार्टी एवं जनहित में आगे आकर पत्राचार किया। जिसका नतीजा यह निकला कि केन्द्र एवं प्रदेश सरकार के सड़क सहित अन्य विकास कार्यो का बजट अपने हिसाब से आवंटित करने वाले सीपी अग्रवाल किनारे लग गए हैं।

जांच के प्रमुख बिंदु :-

1- कार्य प्रारंभ करने के पूर्व विद्यमान सतह के ओजीएल लिए जाने चाहिए। अधीक्षक यंत्री, लोनिवि, मण्डल रीवा के पत्र क्रमांक 9452/कार्य/2021/दिनांक 28.01.2021 द्वारा अवगत कराया कि कार्यपालन यंत्री द्वारा ओजीएल प्रस्तुत नहीं किया गया है। इस संबंध में अधीक्षण यंत्री स्तर से भी समुचित कार्यवाही नहीं की गई।

2- कार्य संपादन में स्थल पर मात्रा का वास्तविक आकलन हेतु एफआरएल तैयार किया जाकर अधीक्षण यंत्री द्वारा अनुमोदित किया जाना चाहिए, परन्तु इस कार्य में एफआरएल का निर्धारण नहीं किया गया।

3- प्रोफाईल करेक्टीव कोर्स (पेंच वर्क/डब्ल्यू, एम.एम.) का कार्य एफआरएल के अभाव में बगैर वास्तविक आंकलन के कार्य कराया गया।

4- परीक्षण में यह भी पाया गया कि उक्त कार्य में दिनांक 29.11.2019 को एजेंसी निर्धारित होने के बावजूद उसी स्थल पर पेंच रिपेयर कार्य हेतु अन्य एजेंसी को पृथक से 07 एलओए दिनांक 04.01.2020 को कार्यपालन यंत्री, लोनिवि, सतना द्वारा जारी किए गये। एक ही स्थल पर दो एजेंसी द्वारा कार्य करना संदेहास्पद है।

5- मध्यप्रदेश शासन लोनिवि भोपाल के परिपत्र क्रमांक एफ/58/24/15/19/यो भोपाल दिनांक 06.08.2015 में 5 करोड़ से अधिक के लागत के कार्य बैच मिक्स प्लांट से कार्य कराने के निर्दश हैं। उक्त कार्य ड्रम मिक्स प्लांट से कराया गया है।

6- मध्य प्रदेश, विमानन विभाग के पत्र क्रमांक एफ 3-17/1989/पैंतालीस भोपाल दिनांक 01.10.2018 द्वारा स्वीकृति अनुसार रनवे एवं एफ हेलीपेड का नवीनीकरण कार्य किया जाना था, परन्तु स्थल पर स्वीकृति के अतिरिक्त दो नग नवीन हेलीपेट एवं एक नग एप्रोन का कार्य प्रशासकीय विमानन विभाग के बगैर अनुमति के कराया गया।

7- रनवे के दोनों ओर विद्यमान बीटी सतह पर 6.8 मीटर चौड़ाई में सीधे डब्लूएमएम कार्य किया गया है, जो तकनीकी दृष्टि से उचित नहीं है।

8- नवीन निर्मित एप्रोन 8100 वर्ग मीटर एरिया निर्माण में डब्लूएमएम सतह के ऊपर बगैर बेस कोर्स (डीबीएम) के बीसी का कार्य किया गया, जो उचित नहीं है।

9- मध्यप्रदेश शासन, लोनिवि, भोपाल के परिपत्र क्रमांक 2257/2331/18/19/यो/ भोपाल दिनांक 01.06.2018 में अनुबंधित कार्य के ठेके की राशि के 10 प्रतिशत अधिक की सीमा तक के समस्त वेरियेशन संबंधित मुख्य अभियंता द्वारा स्वीकृत किए जाने के निर्देश हैं। परीक्षण में पाया गया कि उक्त अनुबंध में प्रमुख अभियंता की बिना अनुमति के अनुपूरक कार्य राशि रूपये 99.15 लाख स्वीकृत किया गया।

यह है तकनीकी गड़बड़ी

सतना हवाई पट्टी के नवीनीकरण में किए गए डीबीएम के कार्य में डामर की मात्रा मिक्स डिजाइन फार्मूला के आधार पर 4.6% होनी चाहिए, परंतु केंद्रीय जांच अन्वेषण प्रयोगशाला प्रमुख अभियंता कार्यालय भोपाल से प्राप्त जांच रिपोर्ट में रनवे के सीएच 100 मीटर के बीच दिए गए सैंपल में 1.81 प्रतिशत डामर की मात्रा प्राप्त हुई है, जो 2.79 प्रतिशत कम है। इसी तरह सीएच 768 बाएं तरफ 3.5 मीटर में लिए गए सैंपल में 3.36 प्रतिशत जो 1.24 प्रतिशत कम है। साथ ही हेलीपैड के दिए गए सैंपल में डामर की मात्रा 3.55 प्रतिशत पाई गई, जिसमें डामर की मात्रा 1.05 प्रतिशत कम है। इतना ही नहीं कंप एक्शन में भी कमी पाई गई है। 90 प्रतिशत कंप एक्शन की जगह सीएच 100 में 84.4 प्रतिशत, सीएच 768 में 84.1 प्रतिशत तथा हेलीपैड में 84.6 प्रतिशत पाया गया है। जो क्रमशः 5.6 प्रतिशत, 5.9 प्रतिशत व 5.4 प्रतिशत कम है। निर्धारित स्पेसिफिकेशन के आधार पर डेंसिटी भी 2.55 ग्राम पर सीसी से कम पाई गई है। इसी प्रकार बीसी के कार्य में निर्धारित डामर मात्रा बांध संभव 5.6 प्रतिशत की जगह 3.59 प्रतिशत, 4.21 प्रतिशत 3.98 प्रतिशत तथा 4.23 सीएच 100, सीएच 768, सीएच 855, सीएच 2228 हेलीपैड में पाई गई है। जो क्रमशः 2.01 प्रतिशत, 1.39 प्रतिशत तथा 1.62 प्रतिशत और 2.37 प्रतिशत कम है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया है कि रनवे में किया गया डामर नवीनीकरण हंगरी अर्थात पोरस है तथा पूरे रनवे में अनड्यूलेशन है। कार्य प्रारंभ करने के पहले ओरिजिनल ग्राउंड लेवल तथा फाइनल एफआरएल नहीं लिए गए, जिससे करेक्टिव कोर्स तथा पैच की वास्तविक मात्रा का आकलन नहीं हो सका। साथ ही 98.8 लाख की अनुपूरक मात्रा बढ़ाई गई है, जो 10 प्रतिशत से अधिक है। जिसकी स्वीकृति प्रमुख अभियंता या शासन स्तर से होनी चाहिए। इस तरह से सतना हवाई पट्टी के नवीनीकरण में घोर अनियमितताएं की जाकर हवाई पट्टी जैसे अति संवेदनशील जगह में अति गुणवत्ता विहीन कार्य कराया गया है। अभी से हवाई पट्टी का रनवे उखड़ने लगा है। सतना हवाई पट्टी में हमेशा नागपुर मुंबई दिल्ली के लिए मरीजों को ले जाने के लिए एयरक्राफ्ट का आगमन होता रहता है। कभी भी भारी दुर्घटना होने की संभावना है। शासन स्तर पर जांच कमेटी द्वारा दिए गए रिपोर्ट को अपने ही अनुसंधान को गलत ठहरा कर अपने ही अधिकारियों पर छीछालेदर कर पत्राचार तत्कालीन प्रमुख अभियंता सीपी अग्रवाल द्वारा अपने ही कार्यालय के अधिकारी मुख्य अभियंता एआर सिंह द्वारा सौंपी गई जांच रिपोर्ट में प्रश्न लगाए गए। प्रमुख अभियंता तथा अधीक्षण यंत्री एके निगम द्वारा 3 माह पहले जांच रिपोर्ट आ जाने के बाद भी कार्यवाही में लेटलतीफी कर दोषी अधिकारी बीके विश्वकर्मा कार्यपालन यंत्री लोक निर्माण विभाग संभाग सतना, बृजेश सिंह अनुविभागीय अधिकारी उप संभाग सतना तथा एके निगम उपयंत्री को बचाने में सहभागिता निभा रहे हैं। इससे सतना जिले के जनप्रतिनिधि तथा आम जनता में काफी रोष व्याप्त है।

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