मध्यप्रदेश

धीरे-धीरे ज्वाला बन सुलग रही पृथक विन्ध्य प्रदेश की चिंगारी

कलयुग की कलम

धीरे-धीरे ज्वाला बन सुलग रही पृथक विन्ध्य प्रदेश की चिंगारी

सतना, (ओपी तीसरे)। जनहित में जो ठान लिया वह करना है। इसे कहते हैं जूनून और इसमें कोई सक या सूबा नहीं कि नारायण त्रिपाठी एक जुनूनी नेता हैं। जो ठान लेते हैं वह करके रहते हैं, फिर हानि हो या लाभ पलट के नहीं देखते। मतलब ‘प्राण जाए पर वचन न जाए’। उनकी इसी फ़िदा पर मैहर क्षेत्र की जन मानस फ़िदा रहती है। शायद इसी का परिणाम है कि उनके विरोध में चुनावी समर में फिर कितना बड़ा धुरंधर क्यों न आ जाए, जीत उन्हीं की ही होती है। न जातपात काम आती, न ही कोई दल। वहां जनता के लिए एक ही दल और जाति रहती है नारायण त्रिपाठी और कोई नहीं। शायद इसी की बदौलत चार बार अलग-अलग दल से क्षेत्र की जनता ने उन्हें सिरमौर बना विधान परिषद तक पहुचाया और आगे भी पहुचती रहेगी। नारायण त्रिपाठी के चोरहट के आगाज से सरकार का सिंहासन डोल उठा। परिणामतः पृथक विन्ध्य को लेकर सतना में आयोजित होने वाले कार्यक्रम की अंदरुनी रिपोर्टिंग प्राप्त कर कोरोना की आड़ लेकर कार्यक्रम को रोकने का हथकंडा अपनाया। पर शायद सरकारों में बैठे जिम्मेवार इस बात को भूल रहे हैं कि अब यह आंदोलन नारायण त्रिपाठी का नहीं, बल्कि विन्ध्य के जन-जन का आंदोलन बन चुका है। जिस पर बंदिशों की बेड़ियां बहुत दिन तक नहीं पहनाई जा सकती। जितना जन की आवाज को बांधने व रोकने का प्रयास किया

गया ये चिंगारी उतना ही विकराल रूप लेगी और उसे रोक पाना किसी भी सरकार के बूते की बात नहीं रह जाएगी। क्योंकि ये जनता है सब जानती है। तो नया सबेरा अपने आप होने लगता है। विन्ध्य पृथक क्यों जरुरी है, यह बात विन्ध्य का बच्चा बच्चा अब जानने लगा है। जिस दिन हुंकार भरेगा सरकारों के लिए गले की हड्डी जरूर बनेगा।

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