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सरकारी खुफिया एजेंसी से डर गई सरकार

कलयुग की कलम

सरकारी खुफिया एजेंसी से डर गई सरकार

जनसभा को शिकार बनाने होली एवं कोरोना के नाम पर एकाएक छेड़ा प्रदेशव्यापी अभियान

सतना, (ओपी तीसरे)।विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन की मांग को लेकर जन आंदोलन खड़ा करने की तैयारियों के बीच 25 मार्च को यहां बीटीआई ग्राउण्ड में होने वाली विशाल जनसभा कोरोना के नाम पर सुनियोजित सरकारी बंदिशों और कार्यक्रम का शिकार हो गई। हालांकि इस आंदोलन की रणनीति बनाने में जुटे विधायक नारायण त्रिपाठी और मुहिम के हजारों समर्थकों ने भी जनहित के मद्देनजर पीछे हटना ही बेहतर समझा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचने वाली सरकारी खुफिया रिपोर्ट ने प्रदेश और केन्द्र सरकार की नींद उड़ा दी थी। इस रिपोर्ट में इकलौते मैहर विधानसभा क्षेत्र से 10 हजार टू व्हीलर एवं फोर व्हीलर के साथ ही अमरपाटन से 3 हजार, रामपुर बाघेलान, सतना, चित्रकूट से करीब 10 हजार वाहनों के अलावा संभाग स्तरीय विन्ध्य पुनरोदय कमेटी की 25 हजार वाहन रैली के बीच एक लाख से अधिक जनों के एकत्र होने का जिक्र किया गया था। इस स्थिति के आधार पर अप्रैल माह में पुराने विन्ध्य प्रदेश क्षेत्र के शहडोल, सिंगरौली, रीवा एवं नागौद में प्रस्तावित आम सभा के मद्देनजर इस आंदोलन का बड़ा रूप लेने के साथ ही सियासी तौर पर बड़े संकट की आहट दिखने लगी। लिहाजा पहले तो होली पर्व के नाम अपना त्यौहार अपने घर का संदेश देने के बाद सरकार ने बड़ी जूझ बूझ के साथ सायरन बजाकर अपने मंत्री, जनप्रतिनिधियों के अलावा प्रशासनिक अमले को पूरे प्रदेश में सड़कों पर उतार दिया। हालांकि बढ़ते संक्रमण को देखते हुए कोरोना से बचाव के लिए आम जनमानस को जागरूक करने किए जा रहे प्रयासों की जितनी सराहना की जाए वह कम है। मगर सियासी स्तर पर विन्ध्य क्षेत्र के लाखों शुभचिन्तक बीटीआई की रैली एवं सभा के पहले अचानक एक्टिव हुई सरकार ने एक पंथ दो काज जैसी बघेली कहावत को चरितार्थ कर सच्चाई को दबाते हुए अपने ही हाथ अपनी ही पीठ थपथपा कर कोरोना के बहाने जन सभा के सैकड़ों आयोजकों को भी इमोशनल रूप से ब्लैकमेल करने का काम किया। जानकारों का तो यहां तक कहना है कि विन्ध्य प्रदेश को लेकर 25 मार्च की सभा हो जाती तो अमरकंटक से लेकर ओरछा तक इतना बड़ा आंदोलन खड़ा होता जिसकी कल्पना सरकारों के जेहन में घुमड़ रही है। यहां उल्लेखनीय है कि पुराने विन्ध्य क्षेत्र के दम पर पिछली तीन पंचवर्षीय भाजपा की सरकार रही है। ऐसे में विन्ध्य को पृथक कर पाना आसान नजर नहीं आ रहा है।
लम्बे समय की लड़ाई मगर कलंक बर्दाश्त नहीं
विधायक नारायण त्रिपाठी और विन्ध्य क्षेत्र के हजारों शुभचिन्तक यह अच्छी तरह जानते हैं कि हमें अपना पृथक राज्य बनाना आसान नहीं है, इसके लिए लंबे समय तक संघर्ष करना पड़ेगा। बीटीआई ग्राउण्ड में सभा की सारी तैयारी हो चुकी थी। पंडाल खड़ा है, गांव और कस्बाई क्षेेत्र से आने वाले लोग वाहन और काफिले की तैयारी कर चुके हैं। किन्तु कोरोना संक्रमण के दूसरे खतरनाक दौर को देखते हुए अपनी जिद पर अड़े विधायक ने पहले तो समाज के बुद्धिजीवी वर्ग, रिटायर्ड चिकित्सक, सेवानिवृत्त अधिकारी, कर्मचारी, व्यापारियों के बीच अपने समर्थकों के रायशुमारी की। खबर है कि समर्थकों के दबाव में नारायण ने जनहित को प्राथमिकता दी। उधर राजनैतिक एवं सरकारी स्तर पर चल रही उठापटक के बीच अपने से जुड़े साथियों के दबाव पर नारायण त्रिपाठी ने माना कि मौजूदा समय पर स्थितियां अनुकूल नहीं है। सभी ने समर्थन करते हुए कहा कि दुर्भाग्य से कोरोना नाम का कलंक हमारे ऊपर लग सकता है, जिसे गंभीरता से लेते हुए विधायक ने यह कहते हुए जनसभा स्थगित करने का एलान किया कि हमारे पास संघर्ष के लिए लंबा समय है मगर कलंक बर्दाश्त नहीं होगा। इस बात के पीछे भी एक सरकारी षड़यंत्र की बू आ रही है।

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