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विन्ध्य प्रदेश पुनर्गठन : विधानसभा अध्यक्ष का भी अप्रत्यक्ष समर्थन

कलयुग की कलम

विन्ध्य प्रदेश पुनर्गठन : विधानसभा अध्यक्ष का भी अप्रत्यक्ष समर्थन

गिरीश गौतम से मुलाकात के बाद सामने आए पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह और अमृतलाल मिश्रा

सतना, (ओपी तीसरे)। विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन को लेकर समर्थन जुटाने चल रहे अभियान के बीच पिछले दिनो विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम के सतना दौरे के बाद जो कुछ हुआ, उसको लेकर रीवा संभाग में सियासी गलियारे में यूं तो कई तरह की चर्चाए हैं, किन्तु इस मुद्दे पर विधानसभा अध्यक्ष का अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन की चर्चा जोर पकड़ रही है जिसको लेकर कहीं न कहीं यह चर्चा सही भी मानी जा रही है। हालाकि इस बात में कोई दो राय नहीं कि गिरीश गौतम से अनौपचारिक मुलाकात के बाद ही भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह एवं वरिष्ठ समाजसेवी तथा प्रतिष्ठित व्यवसायी अमृतलाल मिश्रा अपने साथियों के साथ खुलकर इस मामले में सामने आए।

उल्लेखनीय है कि पिछले दिनोें विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम, वरिष्ठ नेता पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह के निवास पर उनसे मिलने पहुंचे। इस मुलाकात के ठीक दो दिन बाद सर्किट हाउस में विन्ध्य प्रदेश के पुर्नगठन को लेकर सम्पन्न हुई बुद्धजीवियों, व्यापारियों, समाजसेवी एवं चिंतकों की बैठक में पुष्पेन्द्र प्रताप सिंह ने शिकरत की। इतना ही नहीं इन्होंने अपने से जुड़े लोगों को बकायदा फोन कर बैठक में भी बुलाया। ठीक इसी तरह विधानसभा अध्यक्ष गिरीश गौतम और व्यवसायी अमृतलाल मिश्रा की मुलाकात के बाद विधायक नारायण त्रिपाठी ने चेम्बर सहित अन्य व्यापारियों के समर्थन की चर्चा अमृतलाल जी से की। इसी दौरान चेम्बर के पूर्व अध्यक्ष कमलेश पटेल, रामोराम गुप्ता, भरत खेड़ा जैसे व्यापारी भी साथ खड़े हो गए और इन्हीं व्यवसाईयों के प्रयासों में अशोका पैलेस में सम्पन्न बैठक में व्यापारियों ने विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन का समर्थन किया। यही सारी स्थितियां गिरीश गौतम का इस मुद्दे पर अप्रत्यक्ष समर्थन होने का संकेत दे रही है।

मुद्दा दबाने भाजपा ने खेला गिरीश पर दांव

भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी की मानें तो पार्टी ने एक तरफ जहां कार्यवाहक विधानसभा अध्यक्ष रहे सीतारमण को इसी पद पर बनाए रखने का आश्वासन दिया था, वहीं विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन की सुलगती आग पर काबू पाने के लिए इस क्षेत्र के वरिष्ठ विधायक केदारनाथ शुक्ला का नाम फाइनल कर दिया गया था। किन्तु श्री शुक्ला के नाम से जब पार्टी को यह महसूस हुआ कि इससे विन्ध्य प्रदेश का मुद्दा और भी तेज हो सकता है तब भाजपा ने विन्ध्य प्रदेश के पुनर्गठन की अगुवाई कर रहें अपने ही विधायक नारायण त्रिपाठी के नजदीकी रिश्तेदार एवं पार्टी विधायकों ने खेमे के सबसे मजबूत विधायक गिरीश गौतम पर दाव खेला और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष बना दिया गया। अब चूंकि गिरीश गौतम सत्ता एवं संगठन से बंधे हैं, जिस कारण माना जा रहा है कि विधानसभा अध्यक्ष अंदरुनी तौर पर समर्थन कर रहें हैं।

सभी चाहते है विन्ध्य प्रदेश

भाजपा हो या कांग्रेस, बसपा हो या समाजवादी पार्टी, इसके अलावा अन्य पूर्व विधायक हो या फिर पूर्व सांसद व अन्य कई राजनेता हैं जो विन्ध्य प्रदेश का पुनर्गठन चाहते हैं। कोई खुलकर सामने हैं तो कोई अप्रत्यक्ष रूप से हर संभव सहयोग कर रहें हैं। संघर्षशील, अनुभवी पूर्व विधायक रामप्रताप सिंह एवं लक्ष्मण तिवारी इस बात के उदाहरण हैं। हालाकि यह दोनों पूर्व विधायक मिलकर सामने हैं। एक तरफ जहां रामप्रताप सिंह विन्ध्य प्रदेश के सवाल पर आम जनता को आगे आने का आह्वान कर रहे हैं, तो लक्ष्मण तिवारी जन जागरण अभियान में जुटे हुए हैं। यहां यह भी सही है कि विन्ध्य एवं बुंदेलखण्ड क्षेत्र के अधिकांश सांसद विधायक भी विन्ध्य प्रदेश चाहते हैं, किन्तु सत्ता और पार्टी के संगठन ने उनके पैरोें में बेड़ी डाल रखी है।

समाज चिंतक और रिटायर्ड कर्मचारी भी पीछे नहीं

सर्व समाज के हित के साथ विन्ध्य के समुचित विकास, उद्योग, रोजगार, आर्थिक सम्पन्नता सहित विकासशील राज्य की कल्पना संजोए बैठे चिंतनशील जनों की भी कमी नहींं है। समाज का दर्पण माने जाने वाले जयराम शुक्ल, शालिगराम शर्मा, चिंतामणि मिश्रा, सुदामा शरद, कुमार कपूर जैसे कई नाम हैं, जिनके मार्गदर्शन में समर्थन जुटाने की मुहिम ने रफ्तार पकड़ ली है। वहीं विन्ध्य क्षेत्र के रिटायर्ड कर्मचारियों एवं अफसरों की एक बड़ी फौज भी खड़ी हो गई है। एचएन सिंह, सुधाकर सिंह, वीके राय, बद्री प्रसाद तिवारी जैसे अनेक सेवानिवृत्त अफसर एवं कर्मचारियों ने मिलकर अपने ही जैसे साथियों के साथ जन जागरण की अलख ऐसे लोगों को जोड़ लिया है, जो विन्ध्य प्रदेश की जरूरत बताकर हर आयु वर्ग के लोगों का जमीनी समर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।

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