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बलात्कार के मामले में झूठी साबित हुई गवाही : आरोपी बाइज्जत बरी

कलयुग की कलम सतना

बलात्कार के मामले में झूठी साबित हुई गवाही : आरोपी बाइज्जत बरी

सतना, (कलयुग की कलम)। जिला न्यायालय के विशेष सत्र न्यायाधीश (पास्को एक्ट) की अदालत में गवाहों द्वारा लगाए गए आरोपों में गवाही झूठी साबित होने पर पास्को एक्ट एवं बलात्कार के आरोपी करुण सिंह चौहान निवासी सीधी को बाइज्जत बरी कर दिया गया। आरोपी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता विकास पाण्डेय एवं योगेंद्र सिंह जयशूर ने पैरवी की। अधिवक्ताद्वय ने बताया कि अभियोक्त्री के जीजा ने दिनांक 4 अप्रैल 2018 को थाना कोठी में गुमशुदा की रिपोर्ट लिखाई थी कि मेरी साली को मेरे ससुर दिनांक 20 मार्च 2018 को सीधी से मेरे पास छोड़ गए थे। दिनांक 30 मार्च 2018 को मैं परिवार सहित भागवत सुनने सतना गया था। घर में साली अकेले थी। कोई अज्ञात व्यक्ति बहला फुसलाकर उसे घर से ले गया एवं अभियोक्त्री की उम्र 16 वर्ष निवासी सीधी है जो दिनांक 6 अप्रैल 2018 को थाना कोठी में दस्तयाब हुई। पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष अपने कथनों में बताया कि अभियुक्त मुझे सतना से कटनी और फिर मुंबई ले गया। अभियोक्त्री और अन्य साक्षियों के बयान के आधार पर थाना कोठी में प्रथम सूचना रिपोर्ट अपराध क्रमांक- 61/2018 धारा 363, 376 (2) (ढ) आईपीसी, धारा 5 (1) (2), 5(1) (6) पास्को एक्ट दर्ज हुआ, जो विशेष सत्र प्रकरण क्रमांक 196/2019 है। न्यायालय में 12 अभियोजन साक्षियों की अभियोक्त्री के पक्ष में परीक्षण हुआ और बचाव पक्ष की ओर से दो साक्षी परीक्षित हुए। न्यायालय में अभियोक्त्री ने अपनी उम्र 18 वर्ष से कम के लिए प्रमाण में कक्षा 10वीं की अंकसूची प्रस्तुत करते हुए पुलिस और मजिस्ट्रेट के समक्ष दिए गए बयानों की पुष्टि की। अभियोजन साक्षीगण अधिवक्ता विकास पांडेय की जिरह और दलीलों में आरोपी पर लगाए गए आरोपों पर स्थिर न रहे और अभियोजन के गवाहों की साक्ष्य संदेहास्पद और झूठी साबित हो गई। न्यायालय ने अधिवक्ता द्वारा की गई साक्षियों की जिरह और अंतिम तर्क के दौरान पेश की गई दलीलों और उच्चतम न्यायालय के न्यायिक दृष्टांतों के अवलोकन के पश्चात पाया कि मामला सरासर झूठा और बनावटी है, जो संदेह से परे प्रमाणित नहीं है। लिहाजा विशेष सत्र न्यायाधीश (पास्को एक्ट) दोनों पक्ष के अधिवक्ताओं की बात सुनने के पश्चात प्रकरण में अदालत में पेश किए गए साक्ष्य और सबूतों का परीक्षण कराए जाने पर यह पाया कि आरोपी पर लगाए गए बलात्कार के आरोप अभियोजन पक्ष सिद्ध नहीं कर पाया, जिससे आरोपी करुण सिंह चौहान पिता अभयराज सिंह निवासी सीधी को बलात्कार और अपहरण के आरोप से दोषमुक्त करते हुए बाइज्जत बरी किया। इस पूरे मामले के विचारण के दौरान आरोपी जेल में बंद रहा। उच्च न्यायालय ने आरोपी की अभियोक्त्री और अन्य साक्षियों के द्वारा पुलिस में दिए गए बयान के आधार पर जमानत खारिज कर दी थी। किंतु अधिवक्ताद्वय विकास पाण्डेय ने आरोपी की ओर से पैरवी करके उसे न्याय दिलाया। उल्लेखनीय है कि अधिवक्ता श्री पाण्डेय ने ऐसे कई मामलों में आरोपियों को जो झूठे आरोपों और रंजिशन फंसाए जाने के आधार पर जेलों में बंद थे, उन्हें न्यायालय से न्याय दिलवा कर बाइज्जत बरी कराया है।

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