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कृषि कानूनों और जनससमयाओं के खिलाफ मेजा तहसील पर किया प्रदर्शन,रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज

कलयुग की कलम

प्रयागराज मेजा भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) तथा अखिल भारतीय किसान सभा ने संयुक्त तत्वाधान में मेजा तहसील प्रांगण में कृषि कानूनों और जनससमयाओं पर प्रदर्शन किया गया। धरने के बाद हुई सभा को सम्बोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि केन्द्र सरकार ने बिना संसद में समुचित बहस कराये एकतरफा तरीके से कृषि सम्बन्धी तीन कानूनों को पारित कर दिये। मण्डी कानून में संशोधन के चलते देश में किसानों की फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य की गारण्टी समाप्त हो जायेगी। इसके चलते किसान अपने फसल को बिचैलियों को औने-पौने दामों पर बेचने के लिए मजबूर हो जायेंगे। ठेका खेती से सम्बन्धित दूसरे कानून के चलते किसान या तो अपने ही खेत में एक बंधुआ मज़दूर बन कर रह जायेगा या बड़ी-बड़ी कम्पनियों के हाथों अपनी ज़मीन से ही हाथ धो बैठेगा। कम्पनी और किसान के बीच में विवाद की स्थिति में न्यायालय में जाने की सम्भावना के समाप्त कर उसे ट्रिब्यूनल तक सीमित करने के फैसले से किसान अपनी आजीविका छिनने तक की स्थिति में भी न्याय के सर्वोच्च दरवाज़े को खटखटा नहीं पायेगा। भण्डारण की सीमा को बढ़ाने वाले तीसरे कानून के चलते जमाखोरी को बढ़ावा मिलेगा जिससे मंहगाई बढ़ेगी और देश की खाद्य सुरक्षा भी खतरे में आ जायेगी। साथ ही प्रस्तावित बिजली विधेयक 2020 बिजली के निजीकरण को बढ़ावा देगा। साथ ही, समूचे देश में विशेषकर कि उत्तर प्रदेश में कानून व्यवस्था चैपट है। कानून के राज की जगह पुलिस के राज ने ले रखी है। जहां एक ओर अपराधी बेरोकटोक घूर रहे हैं और अपराध कर रहे हैं, वहीं पुलिस की सारी सख्ती प्रदर्शनकारियों पर ही दिखाई देती है। दलितों, अल्पसंख्यकों, महिलाओं का विशेष रूप से सामंती, जातिवादी ताकतों तथा पुलिस के गठजोड़ द्वारा विशेष रूप से उत्पीड़न किया जा रहा है। बिना वैकल्पिक व्यवस्था के भूमिहीनों, विशेषकर कि दलितों की ज़मीनें छीनी जा रही हैं। हाथरस से लेकर बदायूं की घटनाएं इसका एक जीता-जागता उदाहरण है। प्रदर्शनकारियों, राजनैतिक कार्यकर्ताओं पर झूठे मुकदमे कायम कर उन्हें उत्पीड़ित करना आम बात हो गई है। इसके अलावा, आये दिन आवारा पशुओं के कारण किसानों की फसल नष्ट होती रहती है। साथ ही, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य (एम0एस0पी0) सरकार के द्वारा तय भी होता है, उसमें भी क्रय केन्द्रों के दूर होने, वहां अनावश्यक शर्तें एवं समय लगाने के कारण, एक किसान अपनी फसल बेच नहीं बेच पाता है। और वह अपनी फसल को कहीं कम मूल्य पर आढ़तियों के हाथों में बेचने पर मजबूर होता है। साथ ही मंहगाई और बेरोज़गारी से त्रस्त ग्रामीण मज़दूरों के लिए मनरेगा और राशन की उपलब्धता सुनिश्चित की जानी चाहिए। परन्तु उसमें भी भारी भ्रष्टाचार व्याप्त है। तहसील के ग्राम छतवां उपरहार में दलित बस्ती के आवागमन के मार्ग पर लम्बे समय से अतिक्रमण व्याप्त है। साथ ही 6000 से अधिक आबादी वाले इस ग्राम सभा में मात्र एक प्राथमिक विद्यालय ही है। प्रदर्शनकारियों ने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने, कानून व्यवस्था दुरूस्त करने एवं पुलिसिया उत्पीड़न पर रोक लगाने, क्रय केन्द्रों को नियमित करने एवं उनमें खरीद सुनिश्चित करने, आवारा पशुओं से फसल को बचाने, मनरेगा को मज़बूत करने सभी गरीबों को सस्ता राशन देने, ग्राम सभा छतवां उपरहार में दलित बस्ती में आवागमन के मार्ग पर व्याप्त अतिक्रमण को समाप्त करने तथा वहां एक प्राथमिक विद्यालय और खोलने की मांग की। सभा को माकपा प्रदेश सचिवमण्डल सदस्य रवि मिश्रा, जिला सचिव अखिल विकल्प, भूपेन्द्र पाण्डेय, विकास स्वरूप, दिग्विजय, चन्द्रमा प्रसाद, मनीष, फूल कुमारी, कृपा शंकर, शिवाकान्त, कॉम. हरिराम पाण्डेय, राजकली भसुन्दर ,चांद मोहम्मद, राज कुमारी, सुधीर कुमार, सौरभ कुमार, राजरूप, डॉ सुभाष सिंह, बब्लू सोनकर, छोटेलाल सिंह, छतवा के छटकलाल निषाद, भोला नाथ सोनकर, गिरजेश पाण्डेय, शिवाधार सिंह, ओमप्रकाश सिंह, श्री भगवान सिंह, अशोक सिंह आदि लोगों ने सम्बोधित किया। सभा की अध्यक्षता कामरेड शुकदेव जी ने तथा संचालन दिग्विजय सिंह ने किया।

उपजिलाधिकारी को धरना के संदर्भ में पूर्व में लिखिति सूचना देने के बावजूद ज्ञापन लेने के लिए कोई सक्षम अधिकारी नही था ।

सीटू के प्रदेश अध्यक्ष कामरेड रवि मिश्रा जी जिलाधिकारी से बात कर यथा स्थिति से अवगत कराया तत्काल जिलाधिकारी के द्वारा तहसीलदार मेजा को धरना स्थल पर पहुँचने के लिए कहा गया ।उसके बाद तहसीलदार धरना स्थल पर आकर क्षेत्रीय जनसमस्याओं का ज्ञापन लिये ।

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