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सरकारी जमीन : एक जैसे मामले में दो तरह की कार्यवाही, उलझन में प्रनिजी स्वामित्व में करने का आदेश : 7 फरवरी और 4 मार्च को भेजी जानकारी में बताया सरकारी

कलयुग की कलम

सरकारी जमीन : एक जैसे मामले में दो तरह की कार्यवाही, उलझन में प्रनिजी स्वामित्व में करने का आदेश : 7 फरवरी और 4 मार्च को भेजी जानकारी में बताया सरकारी

सतना, (ओपी तीसरे)।सरकारी जमीनों को खुर्द-बुर्द किए जाने के मामले में जहां एक ओर भू-माफियाओं के विरूद्ध प्रदेश व्यापी अभियान चल रहा है, वहीं दूसरी ओर यहां प्रशासनिक स्तर पर भू-माफियाओं के साथ शह-मात का खेल खेले जाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। निजी स्वामित्व से सरकारी घोषित की गई भूमि को पुनः निजी स्वामित्व में करने और एक अन्य ऐसे ही प्रकरण में अपील खारिज करने से जुड़े इस मामले में प्रशासन उलझ गया है और अब बचाव के रास्ते तलाशे जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार चित्रकूट के रजौरा पटवारी हल्का की आराजी क्रमांक 102 रकवा 45.28 हैक्टेयर भूमि में से 36 एकड जमीन कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर निजी स्वामित्व में चली गई थी। मामला प्रकाश में आने के बाद तत्कालीन कलेक्टर मनीष रस्तोगी ने राजस्व प्रकरण क्रमांक 30/निगरानी/03-04 में सुनवाई करते हुए साक्ष्य पाए जाने के बाद उक्त भूमि अपने आदेश दिनांक जुलाई 06 को शासकीय घोषित कर दी थी। कुछ वर्षो तक तो यह मामला दबा रहा और नए सिरे से राजस्व अधिकारियों से साठगांठ करने का खेल शुरू हुआ। पहले तो तहसीलदार ने दो तरह के आदेश जारी किए, जिसमें एक में संबंधित भूमि को शासकीय बताया गया तो दूसरे में निजी स्वामित्व में पाया जाना बताया गया। कुछ ऐसे ही दो तरह के आदेश मझगवां के तत्कालीन एसडीएम धुर्वे द्वारा भी जारी किए गए थे। हालांकि बाद में तहसीलदार के एक आदेश को सही मानते हुए एसडीएम ने भूमि को निजी स्वामित्व में किए जाने अपील खारिज कर दी।

कलेक्टर कोर्ट में अपील : जानकार सूत्रों के अनुसार एसडीएम न्यायालय से अपील खारिज हो जाने के बाद नियमतः कमिश्नर न्यायालय में अपील की जाती है, मगर रजौरा की 36 एकड़ भूमि के मामले में कलेक्टर ने अपील पर सुनवाई करते हुए गत 17 फरवरी 2021 को संबंधित भूमि को निजी स्वामित्व में किए जाने का आदेश पारित कर दिया। जबकि इसी तरह के एक प्रकरण में कोलगवां हल्का की आराजी क्रमांक 502, 507, 508, 532, 535 में एसडीएम द्वारा धारा 115/16 के तहत की गई कार्यवाही को निरस्त किए जाने संबंधी प्रकरण को कलेक्टर ने यह कहते हुए खारिज कर दिया कि एक बार निर्णय होने के बाद दोबारा नहीं सुना जा सकता।

और लौटा ली फाइल : शासकीय आराजी को निजी स्वामित्व में किए जाने संबंधी कलेक्ट्रेट से मझगवां एसडीएम कार्यालय तक पहुंची फ़ाइल रहस्यमय तरीके से वापस मंगा ली गई। हालांकि विधायक नीलांशु चतुर्वेदी के तारांकित प्रश्न क्रमांक 2692 के जवाब में 4 मार्च को भेजी गई जानकारी में भूमि को म.प्र. शासन दर्ज बताया गया है। गत 17 फरवरी के आदेश के बाद और वर्तमान में भी उक्त भूमि शासकीय ही दर्ज है, किन्तु कलेक्टर का निजी स्वामित्व में किए जाने संबंधी आदेश कई सवाल खड़े कर रहा है। उधर सूत्र तो यहां तक बताते हैं कि उक्त फाइल चित्रकूट तहसील कार्यालय भी पहुंची थी जो परिक्रमा कर वापस लौट गई।

खतौनी तक में हेराफेरी : शासकीय भूमि को खुर्द-बुर्द किए जाने के एक अन्य मामले में खतौनी में हेरा-फेरी किए जाने के विधानसभा सवाल के बाद यहां प्रशासन में हड़कम्प मचा हुआ है। चित्रकूट क्षेत्र के ही नयागांव पटवारी हल्का की आराजी क्रमांक 274, 282 तथा वन विभाग में दर्ज आराजी क्रमांक 364, 368, 369, 516, 518 को लेकर विधायक नारायण त्रिपाठी ने ध्यानाकर्षण प्रश्न क्रमांक 863 एवं विजयराघवगढ़ के विधायक विजय राघवेन्द्र सिंह ने प्रश्न क्रमांक 496 के जरिए कई सवाल किए हैं। आरोप है कि खतौनी में हेराफेरी के साथ नक्शा भी परिवर्तित किया गया है। इस मामले की जांच भी हो चुकी है, किन्तु जांच रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं हुई है।

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