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लोकतंत्र की खोज,समानता, योग्यता का सम्मान व लोकतांत्रिक व्यवस्था लुप्तप्राय —आर के पाण्डेय।,रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज

कलयुग की कलम

वीआईपी खास, खात्मे पर विश्वास, जनता निराश।

क्रांति से आजादी पाने के बाद आजादी बचाने हेतु महाक्रांति अनिवार्य।

प्रयागराज उपलब्ध रिकॉर्ड के अनुसार क्रांति से प्राप्त आजादी के 74 साल हो गए परन्तु अब इस आजादी को बचाये रखने के लिए एक महाक्रांति अनिवार्य हो गया है।

महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर मीडिया से वार्ता में पीडब्ल्यूएस प्रमुख आर के पाण्डेय एडवोकेट ने उपरोक्त विचार रखते हुए कहा कि आज समानता, योग्यता का सम्मान व लोकतांत्रिक व्यवस्था लुप्तप्राय हो गई है। स्थिति तो इतनी भयावह है कि स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के विचारों के लोकतंत्र की आज खोज की जरूरत है क्योंकि कहीं लोकतंत्र दिखता ही नही बल्कि देश अराजकता व तानाशाही की तरफ बढ़ गया है। पुराने जमींदारों की तर्ज पर राजनैतिक वीआईपी तथा विधायिका, कार्यपालिका व न्यायपालिका के लोगों में स्वयं हेतु खास व्यवस्था बना ली गई है जबकि जनता आज भी उपेक्षित व केवल वोट का मोहरा बन गए हैं जिससे लोकतंत्र में विश्वास ही खत्म होता जा रहा है जबकि जनता पूर्णतया निराश है।

बता दें कि वर्तमान वास्तविकता पर चर्चा करते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट के अधिवक्ता आर के पाण्डेय ने कहा कि देश व राज्य की सरकारें आम जनमानस को एक समान निःशुल्क उत्तम शिक्षा, चिकित्सा व सुरक्षा दे पाने में नाकामयाब रही हैं जबकि जातिवादी आरक्षण से योग्यता का अपमान हो रहा है, हर तरफ भ्रष्टाचार-घोटाला-घूसखोरी- दलाली, निरंकुशता व तानाशाही व्याप्त है। थानों में निर्धन बेसहारों को न्याय के बजाय गलियां मिलती हैं जबकि बड़े खूंखार अपराधियों को सम्मान के साथ कुर्सी दी जाती है। मुख्यमंत्री व अधिकारी जनता दर्शन, जनता दरबार, जन मिलन के नाम पर स्वयं राजा जैसा व्यवहार करते है जबकि प्रायः लोगों को दुत्कार मिलती है। आफ लाइन व आन लाइन दोनों ही प्रकार के शिकायतों पर अधिकांशतः फर्जी रिपोर्ट लगा दी जाती है। आतंकवादियों को अपना पक्ष रखने का मौका मिलता है परंतु जातिवादी जहरीले एससी एसटी ऐक्ट रूपी कानून में बिना किसी जांच-पड़ताल व बिना सुनवाई के सामान्य वर्ग को जबरन जेल में ठूंसा जा रहा है। राजनैतिक तिकड़मबाजों ने समाज को अपनी सुविधानुसार अनेक वर्गों में बांट रखा है। एक प्रदेश की सत्तासीन मुख्यमंत्री जो लगभग 300 सुरक्षाकर्मिर्यो के घेरे में सुरक्षित रहती है व जिसके निगरानी में लगभग 4000 सुरक्षाकर्मी लगे रहते हैं वह स्वयं के पैर फिसल जाने की सामान्य बात को बहुत बड़ा तूल देकर हमला करार देती है जिसके बाद पूरे देश का चैनल उसी को घण्टों दिखाता है कि स्पेशल हॉस्पिटल के 6 डॉक्टर्स की टीम विशेष इलाज करती है लेकिन दूसरी तरफ आज भी इसी देश में बेसहारा लोग तड़प-तड़प कर सड़क पर दम तोड़ देते हैं लेकिन उन्हें कोई पूछने नही आता। आखिर यह घोर अन्याय, अधर्म, अत्याचार, निरंकुशता, तानाशाही, वीआईपी कल्चर कब तक झेलना होगा? निश्चित ही आम जनमानस को विचार करके स्वयं को एक बार पुनः समाजहित, जनहित व राष्ट्रहित में तैयार होकर महाक्रान्ति करनी होगी।

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