UNCATEGORIZED

जंजीर नहीं कटती तो अपने पाँव काट लो

कलयुग की कलम

 

जंजीर नहीं कटती तो अपने पाँव काट लो

लँगड़ा कर चलो मग़र आज़ादी से चलो

कैसे सुरक्षित रहें भेड़ियों की चौकीदारी में भेड़ें

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवता शयानी जहां नारी की पूजा (सम्मान) होती है वहां देवता वास (निवास) करते हैं ।

भारत ऐसी ही देवभूमि रही है । मग़र समय ने करवटें बदली और सब कुछ उलट पुलट होता चला गया ।

भारत के अलावा दुनिया के किसी भी कोने में मातृशक्ति को सम्मानित स्थान प्राप्त नहीं था जो भारत की मातृशक्ति को प्राप्त था । शायद यही कारण रहा होगा अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिला को एक दिनी सम्मान देने का ।

वैसे तो अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस की शुरुआत 1909 में हुई थी लेकिन 1921 में 8 मार्च की तारीख़ महिला दिवस के लिए तय कर दी गई तब साल दर साल 8 मार्च को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर महिलाओं को एक दिनी सम्मान दिए जाने की औपचारिकता निभाई जा रही है । भारत भी लीक के फ़क़ीर की भीड़तंत्र का हिस्सा बना हुआ है ।

कितना अजीब लगता है जब बेटी की इज़्ज़त बचाने पर बाप को सरेआम बीच बाज़ार में मार दिया जाता है, बहन की आबरू बचाते भाई को मौत के घाट उतार दिया जाता है, लव जिहाद के नाम पर धर्म, जाति के तथाकथित ठेकेदारों द्वारा प्रेमियों को जिंदा अग्निदेव को समर्पित कर दिया जाता है* _और देश के प्रधानसेवक सहित राज्यों के सेवकों द्वारा चुल्लू भर पानी में डूब मरने के बजाय महिला सुरक्षा के नाम पर व्याख्यान देते हैं ।

जिस देश के प्रधानसेवक ने ख़ुद घर की महिला को यथोचित सम्मान न दिया हो उससे देश की महिलाओं के सम्मान की उम्मीद करना बेमानी ही होगा ।

जिस देश की संसद और राज्यों की विधानसभाओं से लेकर पंचायतों तक में बलात्कारियों, यौन उत्पीड़नकर्ताओं ने कब्ज़ा किया हुआ है उस देश की भेड़ें कैसे सुरक्षित रह सकती हैं भेड़ियों की चौकीदारी में ?

साल के 365 दिनों में कोई भी ऐसा एक दिन भी नहीं गुज़रता जिस दिन किसी न किसी महिला की आबरू को तार – तार न किया जाता हो । धर्म गुरुओं ने अपनी काली करतूतों से जो कालिख़ पोती है उससे तो शर्मोहया भी आत्महत्या कर चुकी है ।

देश की आधी आबादी के साथ हर दिन दोयम दर्जे का व्यवहार करने के बाद अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस पर सम्मान के नाम पर एक दिन का कलेक्टर, एक दिन का मंत्री – संतरी बनाना महिलाओं का सम्मान नहीं बल्कि उनकी अस्मिता के साथ सबसे बड़ा खिलवाड़ है, घिनौना मज़ाक़ है ।

किसी को भी एक पल के लिये ही सही कलेक्टर बनाने का अधिकार किसी भी कलेक्टर तो क्या देश के प्रथम नागरिक को भी नहीं है । इसी तरह किसी को मंत्री संतरी भी नहीं बनाया जा सकता । सभी पदों की एक प्रक्रिया है, एक मर्यादा है । इस तरह की हरकतें न केवल महिलाओं को अपमानित करती हैं बल्कि उस पद की गरिमा को भी ठेस पहुंचाती हैं ।

दुनिया की आधी आबादी को शत – शत नमन

 

अश्वनी बड़गैंया,अधिवक्ता स्वतंत्र पत्रकार

Related Articles

Leave a Reply

error: Content is protected !!
Close