उत्तरप्रदेश

राज्यपाल महोदया ने राजेन्द्र सिंह(रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग करते हुये ,रिपोर्टर सुभाष चंद्र पटेल प्रयागराज

कलयुग की कलम

दीपप्रज्ज्वलन कर दीक्षांत समारोह कार्यक्रम का किया शुभारम्भ

शिक्षा की पूर्णता के पश्चात् उसका व्यवहारिक संकल्प ही दीक्षान्त कहलाता है

दीक्षान्त समारोह विश्वविद्यालय की बौद्धिक क्षमताओं एवं ज्ञानार्जन करने वाली प्रतिभाओं का महोत्सव

दीक्षांत समारोह में दो छात्राओं को कुलाधिपति पदक सहित 41 स्वर्ण पदक प्रदान किये गये

नैतिकता, ईमानदारी, करूणा और दया जैसे गुणों को अपनाकर सर्वगुण सम्पन्न जनशक्ति बनकर प्रदेश और देश के विकास में निभायें महत्वपूर्ण भूमिका

 

जीवन में स्पष्ट लक्ष्य के साथ आगे बढं़े-राज्यपाल

 

उपाधि विद्यार्थिंयों के लिए गर्व एवं गौरव का क्षण तो होता ही है साथ ही निष्ठावान तथा युगद्रष्टा अध्यापकों के लिए भी सम्मान का अवसर-मंत्री, कौशल विकास

पदक सूची में बेटियों की संख्या अधिक होना महिला सशक्तिकरण का प्रतीक उप मुख्यमंत्री

 

प्रयागराज राज्यपाल महोदया श्रीमती आनन्दीबेन पटेल शुक्रवार को राजेन्द्र सिंह(रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय में आयोजित तृतीय दीक्षांत समारोह में प्रतिभाग करते हुये सर्वप्रथम नवनिर्मित प्रशासनीक भवन का उद्घाटन किया एवं दीपप्रज्ज्वलन कर दीक्षांत समारोह कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। राज्यपाल ने श्री सुमंगलम सेवा न्यास चाड़ी नैनी प्रयागराज के बच्चों को ज्ञाववर्धक, चित्रकारी, कहानी की पुस्तके, रंग, फल, स्कूल बैग का वितरण किया, साथ ही दीक्षांत समारोह के शोभायात्रा में शामिल बच्चों को भी फल व बैग का वितरण किया। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए राज्यपाल महोदया ने अपने सम्बोधन में कहा कि यह अत्यन्त हर्ष और सम्मान का विषय है कि गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के पावन संगम पर स्थित प्रयागराज में स्थित युगपुरूष प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) के नाम से स्थापित विश्वविद्यालय के तृतीय दीक्षान्त समारोह में आप सभी के बीच आकर मुझे अपार प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। दीक्षान्त समारोह में उपाधि एवं पदक प्राप्त सभी विद्यार्थियों को मैं हार्दिक शुभकामनाएं एवं बधाई देती हूँ। शिक्षा की पूर्णता के पश्चात् उसका व्यवहारिक संकल्प ही दीक्षान्त कहलाता है। कोई भी शिक्षित छात्र दीक्षित होकर ही समाज के लिये उपयोगी हो सकता है। दीक्षान्त समारोह विश्वविद्यालय की बौद्धिक क्षमताओं एवं ज्ञानार्जन करने वाली प्रतिभाओं का महोत्सव है। इसका उद्देश्य विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं की बौद्धिक उपलब्धियों को प्रदर्शित, प्रोत्साहित और सम्मानित करना है। इससे विश्वविद्यालय का गौरव बढ़ता है। समाज भी अपनी बौद्धिक सम्पदा से परिचित होता है। मुझे खुशी है कि यह विश्वविद्यालय विकास के पथ पर सत्त अग्रसर है।

राज्यपाल महोदया ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की दूरदर्शिता एवं मानवीय सोच ने कोविड-19 से पूरे देश को आपदा के संकटों से बाहर आने का रास्ता दिखाया। इससे विश्व के विकसित देशों की तुलना में भारत को कम नुकसान उठाना पड़ा। जैसे कोरोना के खिलाफ भारत की लड़ाई एक उदाहरण बनी, वैसे ही अब हमारा वैक्सीनेंशन कार्यक्रम भी दुनिया में एक मिसाल बन रहा है। यह मेड इन इण्डिया वैक्सीन आज भारत की आत्मनिर्भरता का प्रतीक तो है ही भारत के आत्म गौरव का भी प्रतीक है। इस वैक्सीनेंशन कार्यक्रम के माध्यम से भारत अपनी ही नहीं, बल्कि दुनिया की सेवा इसलिये कर पा रहा है क्योंकि भारत आज दवाओं और वैक्सीन को लेकर सक्षम है, आत्मनिर्भर है।

दीक्षान्त समारोह में कुल एक लाख अठारह हजार चैसठ (1,18,064) विद्यार्थियों को उपाधियां वितरित की जा रही है, जिनमें पचपन हजार पाॅच सौ चवालीस (55,544) छात्र और बासठ हजार पांच सौ बीस (62,520) छात्राएं हैं। इस प्रकार यहां उपाधि प्राप्त करने में छात्राओं की संख्या अधिक है। कुलाधिपति पदक दो छात्राओं को तथा 41 स्वर्ण पदकों में से 31 स्वर्ण पदक छात्राओं को मिले हैं। इसके साथ ही गुलाटी स्वर्ण पदक प्राप्त करने वाली दो छात्राएं ही हैं। इससे यह स्पष्ट हो जाता है कि उच्च शिक्षा के प्रति नारी शक्ति का रूझान तेजी से बढ़ रहा है, जो उनके सशक्तीकरण के लिये अत्यन्त आवश्यक है। उन्होंने कहा कि किसी भी विश्वविद्यालय की वास्तविक पहचान वहां के गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन और उच्च स्तरीय शोध से होता है। इसके लिये शिक्षकों और विद्यार्थियों में पूर्ण समर्पण, अनुशासन और दृढ़ संकल्प अपरिहार्य है। शिक्षकों की क्षमता, दक्षता एवं कुशलता में उन्नयन के लिए विश्वविद्यालय में. आई0क्यू0ए0सी0 की स्थापना भी कर दी गई है। वर्तमान में भारत एक विश्वव्यापी ‘ज्ञान-अर्थव्यवस्था’ के रूप में विकसित हो रहा है। हमें नये आत्मनिर्भर भारत के निर्माण का मार्ग प्रशस्त करना है। विश्वविद्यालयों को नये ज्ञान के सृजन, संचयन और विस्तार में निर्णायक भूमिका निभानी है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में भारतीय ज्ञान की सनातन परम्परा तथा मूल्यपरक शिक्षा को बढ़ाने की बात कही गई है। क्योंकि किसी भी देश के विकास में मानव संसाधन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। मैं इस विश्वविद्यालय से उम्मीद करती हूँ कि नई शिक्षा नीति के आलोक में ऐसे पाठ्यक्रम का निर्माण करे, जिससे अध्ययन के लिये विषयों के रचनात्मक संयोजन को सक्षम बनाने में बढ़ावा मिले। वर्ष 2021-22 के बजट में केन्द्र सरकार ने न सिर्फ अच्छी शिक्षा पर फोकस किया है, बल्कि लोगों के कौशल में निरन्तर वृद्धि होती रहे इसके लिये भी कई घोषणाएं की है। विश्वविद्यालय इसका लाभ उठाये और देश को आत्मनिर्भर बनाने में योगदान दें। आज जिन विद्यार्थियों को उपाधि एवं पदक प्राप्त हुई हैं, एक बार फिर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँं। आप सभी को अपनी उपलब्धियों पर गर्व होगा, किन्तु जिन्दगी में आप जो भी उपलब्धि प्राप्त कर रहे हो, उसके साथ-साथ नैतिकता, ईमानदारी, करूणा और दया जैसे गुणों को भी अपनाना होगा, जिससे आप सब सर्वगुण सम्पन्न जनशक्ति बनकर प्रदेश और देश के लिये महत्वपूर्ण योगदान कर सकें। जीवन में आपका लक्ष्य स्पष्ट होना चाहिये और उस लक्ष्य की प्राप्ति के लिये निरन्तर प्रयास करते रहना चाहिये। मुझे आशा ही नहीं पूर्ण विश्वास है कि प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भय्या) विश्वविद्यालय गुणवत्तायुक्त शिक्षा एवं संस्कृति के नये मानक एवं प्रतिमान गढ़ेगा। एक सशक्त, समर्थ एवं आत्मनिर्भर भारत बनाने में अपना अप्रतिम योगदान देगा। विश्व गुरू के उस महान गौरवशाली परम्परा के संवाहक बनने मंे अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन करेगा। विश्वविद्यालय से उपाधि प्राप्त विद्यार्थी निश्चित रूप से विज्ञान, कला, साहित्य एवं ज्ञान के विभिन्न अनुशासनों में अपना परचम लहरायेंगे। भारत एवं भारतीयता के भावबोध से युक्त ज्ञान की गंगा से पूरे विश्व को आप्लावित करेंगे। इसी विश्वास के साथ मैं आपके उज्ज्वल भविष्य की कामना करती हूँ और विश्वविद्यालय की निरन्तर प्रगति की कामना करती हूँ।

मंत्री कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्री भारत सरकार डाॅ0 महेन्द्र नाथ पाण्डेय जी ने कहा कि दीक्षांत समारोह मात्र एक औपचारिकता नहीं है, जिसमें उपाधियों को वितरण किया जाता है, मेरे विचार से यह समारोह किसी भी विश्वविद्यालय के कार्य तिथियों में अपना अन्यतम स्थान रखता है। यह केवल विद्यार्थिंयों के लिए गर्व एवं गौरव का क्षण नहीं है, अपितु उनकी इस उपलब्धि के पीछे उन निष्ठावान तथा युगद्रष्टा अध्यापकों के लिए भी सम्मान का अवसर है। शिक्षा ही वह माध्यम है जो मनुष्य के सामाजिक उत्थान एवं प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है, ज्ञान के क्षेत्र में वृद्धि करती है और मस्तिष्क को प्रकाशमान करती है। वर्तमान में भारत सरकार द्वारा देश के युवाओं के सपनों को मूर्त रूप देने के लिए कौशल विकास एवं उद्यमशिलता जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय का गठन किया गया है। यह मंत्रालय प्रधानमंत्री जी के द्वारा आह्वान एक सशक्त भारत, समृद्ध भारत और कौशल युक्त भारत को बनाने में महत्वपूर्ण योगदान कर रहा है। इसका महत्वपूर्ण उद्देश्य युवा पीढ़ी को रोजगारयुक्त तथा आत्मनिर्भर बनाना है। तकनीकी ज्ञान के क्षेत्र में विश्व ने अत्यधिक प्रगति की है अब हमारे समक्ष नई चुनौतिया आ गयी है। शिक्षा का क्षेत्र भी इससे अक्षुता नहीं रहा है। भारत ने भी शिक्षा, विशेष कर सूचना प्रौद्योगिकी, नाभिकीय विज्ञान, विज्ञान की अन्य विद्याओं कृषि, अंतरिक्ष विज्ञान, तकनीकी क्षेत्र, चिकित्सा, अभियांत्रिकी आदि क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रगति की है। इस दृष्टि से उच्च शिक्षा की दिशा व स्तर महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि मैं सभी विद्यार्थिंयों को बधाई देता हूं और अनुरोध करना चाहता हूं कि भविष्य आपका है, आपके सामने अवसरों से युक्त सम्भावनाओं को एक विशाल क्षितिज है। अपने ज्ञान को आगे बढ़ाये और उन सम्भावनाओं को साकार करियें अपने कर्म और उपलब्धियों से विश्विद्यालया का सम्मान बढ़ाईयें और राष्ट्र को उत्थान की दिशा में आगे बढ़ाईयें।

मा0 उप मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश डाॅ0 दिनेश शर्मा ने अपने सम्बोधन में दीक्षांत समारोह में उपाधि पायें छात्रों को शुभकामनाएं दी। पदक सूची में बेटियों की संख्या बेटो से अधिक होने पर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह महिला सशक्तिकरण का प्रतीक है। आने वाले समय में नई शिक्षा नीति 2020 के माध्यम से विद्यार्थिंयों के अंदर सोच एवं रचनात्मक क्षमता बढ़ाकर सीखने की प्रक्रिया को और अधिक बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है। नई शिक्षा नीति एक बहुविश्यक दृष्टिकोण की प्रासंगिकता पर केन्द्रित है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थी का सर्वांगीण विकास करना है। नई शिक्षा नीति एक नये पाठ्यक्रम और शिक्षा की संरचना के पुनगर्ठन की कल्पना करती है। इसके अंतर्गत प्रवेश और निकाक की जो नई व्यवस्था है, वह विद्यार्थिंयों को शिक्षा से जोड़े रखने में सहायक होगी। नई शिक्षा नीति रोजगार परक है। इसमें कौशल विकास से लेकर प्रौद्योगिकी एवं तकनीकी ज्ञान तक को शामिल किया गया है। नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 देश के अधिक से अधिक युवाओं को रोजगार से जोड़ेगी। उन्होंने कहा कि हमारा लक्ष्य डिजिटल शिक्षा को बढ़ावा देना है। हमारी नीति है कि 70 प्रतिशत पाठ्यक्रम काॅमन होने चाहिए। 30 प्रतिशत विश्वविद्यालयों द्वारा तैयार किये गये होने चाहिए, जिससे बच्चों को कहीं पर भी एडमिशन लेेने में परेशानी न हो। हमारा प्रयास है कि सभी विश्वविद्यालयों में डिजिटल लाइबेे्ररी और ई-सुविधा केन्द्र की स्थापना हो। साथ ही आॅनलाइन शिक्षा पर जोर दिया जाना चाहिए।

प्रो0 राजेन्द्र सिंह(रज्जू भैय्या) विश्वविद्यालय के कुलपित प्रो0 कामेश्वर नाथ सिंह ने कुलाधिपति राज्यपाल महोदया, केन्द्रीय मंत्री एवं उपमुख्यमंत्री जी का स्वागत एवं आभार प्रकट करते हुए अपने सम्बोधन में कहा कि यह विश्वविद्यालय स्थापना काल से अद्यतन भारतीय गति मान्यता ‘‘चरैवति-चरैवति’’ का अनुपालन करते हुए अपने बहुमुखी विकास के पथ पर अग्रसर है। उन्होंने बताया कि कोविड के समय में विश्विद्यालय द्वारा सूचना और प्रोद्योगिकी के तहत आॅनलाइन माध्यम से पठन-पाठन का कार्य सुचारू रूप से किया गया। विश्विद्यालय ने ई-पाठशाला नामक वेबपोर्टल विश्विद्यालय की वेबसाइट पर जारी कर दिया है। ई-पाठशाला शिक्षकों, छात्रों, अभिभावकों, अनुसंधानकर्ताओं और शिक्षाविदों को शिक्षा की सुविधा के लिए शैक्षणिक संसाधनों संे युक्त वेबपोर्टल है। विश्वविद्यालय में नैक कराने की दिशा में आई.क्यू.ए.सी. प्रकोष्ठ का गठन कर दिया गया है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना युग पुरूष प्रो0 राजेन्द्र सिंह (रज्जू भैया) के नाम पर की गयी है, इसलिए विश्वविद्यालय इस महान विभूति के नाम पर एक शोधपीठ स्थापित कराने के लिए कृतसंकल्प है। उन्होंने कहा कि उपाधि प्राप्त छात्र-छात्राओं को मेरी शुभकामनाएं और विद्यार्थियंों से उम्मीद करता हूं कि सामाजिक जीवन के विविध क्षेंत्रों में काम करते हुए चरित्र की शुद्धता को बनायें रखेंगे।

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