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सारे फसाद की जड़  पर्ची…….पर्ची…… पर्ची…..

कलयुग की कलम

युवा शशांक पोते की दादागिरी के दम-खम के बल पर दादा ने कर_डाली बुजुर्ग से मारपीट_

       मनोज शर्मा पुजारी✍️

रतलाम

शहर में पिछले शुक्रवार को जय श्री संतोषी माता के दिन चाॉदनीचौक क्षैत्र के नामचीन, मशहूर (उस्ताद) के जिगरी सराफा व्यवसायी ए.पी.ज्वेलर्स के मालिक अनिल पुरोहित के पिता सेवा निवृत्त. शासकीय अस्पताल के कम्पाउंडर हरीश पुरोहित एवं कटारिया परिवार के जमाई राजा युवा शशांक पुरोहित इन दोनों दादा और पोते ने मिलकर वरिष्ठ पत्रकार रमेश सोनी के पिता सराफा व्यवसायी श्यामलाल सोनी के साथ शुक्रवार संतोषी माता के शुभ दिन ही असंतोष फैलाकर काफी,ठोका,पीटी कर डालने से माणक चौक थाने में पंहुचा मामला, इतना ही नहीं बैचारे श्यामलाल सोनी शासकीय चिकित्सालय के बिस्तर पर चार दिन तक अपनी कराह से तड़पते रहे ।

              सोने-चांदी वाली पर्ची ने एक बार फिर पुराना इतिहास दोहरा दिया दस ग्राम सोना, नो ग्राम सोना, यानि कि एक ग्राम सोने की कीमत का डिफरेंस पॉच हजार रुपये की अदनी सी, मामूली-सी लेनदेन की वजह से हाहाकार मच गया और इनकी दादागिरी की बेरहमी का शिकार एक 80-वर्ष के बुजुर्ग हो गये जिनका इस विवाद से कोई सरोकार नहीं था ।

               किसी जमाने में जगत् प्रसिद्ध (उस्ताद) के खासम-खास शिष्य अनिल महाशय उस दौर में (उस्ताद) की शानदार और जानदार झांकीबाजी की आड़ में जिंदगी की दौड़ में चार आने,आठ आने,वाली साईकिल ऐसी चली कि आज लाखों-करोड़ों के कारोबार से स्वयं अनिल उस्ताद….उस्ताद….. बन गये ।

            एक ग्राम सोने की उलझन ऐसी पड़ी की मारपीट और सारे फसाद की जड़ यह सोने वाली पर्ची बन गई । यह जो पर्ची है ना इस पर्ची का पुरोहित खानदान का बहुत पुराना रिश्ता चला आ रहा है । पहले यह पर्ची (आंकड़े) की थी और आज सोने-चांदी की चल गई है । कई वर्षों पहले भी कई बार इसी आंकड़े वाली पर्ची से धमाल-चौकड़ी आये दिन होती थी । बस अब तरीका-सलीका बदल गया है । पहले ऐरे-गैरे – नत्थू-गैरे चढाई कर बैठते थे । वो तो भला हो पंजा पार्टी वाले उस्ताद की बदौलत शहर की अवाम में धाक थी । यह (पंजा पार्टी वाले उस्ताद ) के नहीं हुये तो औरों के क्या होंगे ? इस बात का इतिहास साक्षी रहा हैं,और रहेगा । अब ए. पी .ज्वैलर्स सराफा व्यापारीयों को मारने ठोकने पीटने वाले दादा पहलवानी उधारी की लेन-देन कैसे की जाती है । यह भी अच्छी तरीके से जानते हैं । एक बार फिर इसी पर्ची के चक्कर में सेवा निवृत्त कम्पाउन्डर हरीश पुरोहित एवं कटारिया परिवार का जमाई राजा ठोका पीटी से स्वर्ण नगरी में एक बार फिर चर्चित हो गये आखिर पट्ठे किस के हैं.

.उस्ताद के..उस्ताद के..उस्ताद के……. तभी तो लोग उस्ताद समझेंगे । भैय्याजी दूर से ही तेल देख रहे हैं, और तेल की धार देख रहे हैं ।

 तब तक मिलते हैं छोटे से अंतराल के बाद…………?

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