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:::::::::::::::: गमले :::::::::::::::::::::::

कलयुग की कलम

::::::::::::::::: गमले :::::::::::::::::::::::

आज सुबह सुबह हमारे मोहल्ले में

एक महिला सिर पे बांस की टोकरी  में

मिट्टी के गमले लिए आ पंहुची ।

और उसने आवाज़ लगाई

” गमले ले लो गमले “

मैंने मन ही मन सोचा

जिंदगी में गमों की कमी नहीं

 फिर भी ये कहती है

 गमले ले लो

मैंने दरवाजे में लगे परदे की

आड़ से झांक कर देखा फिर

सोचा , गमले लेना बुरा नहीं है ।

क्योंकि गमले बेचने वाली कम उम्र

 खूबसूरत महिला थी ।

इसके गमों को लेने से मुझे पुण्य फल प्राप्त होगा ।

  यही सोच कर उसके गमों को कम करने के लिहाज से मैंने गमले ले लिए .

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डॉ.मन्तोष भट्टाचार्य

        जबलपुर

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