प्रयागराज

लोहड़ी के त्यौहार की क्षेत्र में धूम- पतविंदर सिंह  रिपोर्टर सुभाष चंद पटेल प्रयागराज नैनी

कलयुग की कलम

प्रयागराज नैनी समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह ने बताया कि 13 जनवरी लोहड़ी की संध्या 6:00 बजे से जगह-जगह त्यौहार पर कथा-विचार-पाठ-सिमरन,लोक-गीत-संगीत l लोहड़ी,नववधू वं घर में पहले बच्चे के आगमन पर विशेष रूप से लोहड़ी मनायी जाती है lइस मौके पर खुले स्थान पर पवित्र अग्नि जलायी जाती है और परिवार व आस-पड़ोस,मित्र लोकगीत गाते हुए नए धान के लावे के साथ- साथ खीर,मक्का,गुड़,रेवड़ी,मूंगफली आदि पवित्र अग्नि को समर्पित कर उसकी परिक्रमा करते हैंl त्योहार की खुशियां प्राप्त करने के लिए छोटे बड़े एक-दूसरे से गले मिलकर आशीर्वाद और खुशियां प्राप्त करते हैंl

समाजसेवी सरदार पतविंदर सिंह ने बताया कि लोहड़ी पर लोकगीत

“सुंदर मुंदरिये हो

तेरा कौन बिचारा हो

दुल्ला भट्टी वाला हो

दुल्ले धी विआही हो

सेर शक्कर पाई हो ——- की धूम होती हैl

सरदार पतविंदर सिंह ने कहा कि इतिहास यह बताता है कि यह वह गीत है जिसे मंत्रों की तरह गा कर दुल्ला भट्टी ने मुगल अधिकारियों द्वारा अपहृत दो कन्याओं सुन्दरी और मुन्दरी को मुक्त करा कर जंगल में ही मकर संक्रांति के एक दिन पूर्व फेरे लगवा कर उनके मंगेतरों से विवाह करवा दिया था।

1569 में जन्में दुल्ले भट्टी के इस शौर्य की स्मृति में मनाये जाने वाले लोहड़ी के लोक पर्व को धार्मिक सद्भाव के लोक पर्व की भाँति ही मनाया जाता है खुले स्थान में एकत्रित लकड़ियों के सम्मुख अरदास कर के लोहड़ी की अग्नि जला कर अन्न अर्पित कर के मनाना जाता है

उल्लेखनीय है कि बागी दुल्ला भट्टी जो शासकीय खजाना लूट कर गरीब जनता की मदद करता थाl

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