मध्यप्रदेश

पंचतत्व में बिलीन हो गईं परोपकार की प्रतिमूर्ति रामवती बइया

कलयुग की कलम

रीवा, अपनी उदारता व कुशल जीवनशैली को लेकर सुप्रसिद्ध व्यक्तित्व यूं कहें तो जैसा नाम वैसा ही गुण, अनंतपुर के वरिष्ठ समाजसेवी सत्यनारायण मिश्रा की धर्मपत्नी श्रीमती रामवती मिश्रा ‘बइया’ का एकादशी के दिन 86 वर्ष की उम्र में स्वर्गवास हो गया। बता दें की बइया परोपकार की साक्षात प्रतिमूर्ति थीं। घर-परिवार, नात-रिश्तेदार,ग्रामीणों के साथ ही दीन-दुखियों,साधू-संतों,भिक्षुओं व किसी भी आगंतुक के प्रति स्नेह भाव रखते हुए घर आने पर उन्हें जलपान व भरपेट स्वादिष्ट भोजन कराने के लिए बइया का विशाल ह्रदय था,लोग यहां तक कहते हैं की उनके घर से कभी भी कोई भूंखा वापस नहीं गया। नारियल के समान बाहर से कठोर एवं आंतरिक मन से कोमल ह्रदय बइया का सबसे अच्छे संबंध व व्यवहार थे। इन्हीं पुण्यकर्मों के चलते बइया का एकादशी के दिन स्वर्गवास हुआ। ऐसी पुण्यआत्मा के स्वर्गवास से धरती के साथ ही गांव घर परिवार व शुभचिंतकों को बड़ी क्षति हुई है।

रविवार को अनंतपुर में ही बइया को अंतिम विदाई देकर उनका अंतिम संस्कार पूर्ण रीति-रिवाज से किया गया। बइया सुहागन रहते हुए अपने पीछे तीन बेटों के परिवार व दो बेटियों का भरा पूरा परिवार छोड़कर चली गईं।

युगों युगों तक जीवित रहती हैं बइया जैसी पुण्यात्मा:- कान्हा जी महाराज

युवा एकता परिषद युवा आगाज के मार्गदर्शक मंडल से वरिष्ठ संत कान्हा जी महराज बृंदावन ने कहा की बइया जी जैसी पुण्यात्मा आम जनमानस के बीच युगों युगों तक जीवित रहती हैं ऐसी पुण्यात्मा को हम सादर नमन करते हैं। मानवजाति को सीख लेकर अपने जीवन में इनके आदर्शों को अपनाना चाहिए वही जीवन की सफलता के मार्ग की ओर ले जाते हैं।

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